भोपाल नगर निगम (BMC) में एक और निर्माण घोटाले ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गोविंदपुरा क्षेत्र में एक छोटे नाले को ढकने के काम में कागजों पर 16 टन से ज्यादा लोहे की खपत दिखाकर लाखों का बिल पास कराने की तैयारी सामने आई है। मामला उजागर होते ही निगम स्तर पर खलबली मच गई है।

छोटा नाला, भारी-भरकम खपत

जिस नाले को आरसीसी स्लैब से ढका गया है, उसकी लंबाई करीब 240 मीटर और चौड़ाई लगभग तीन फीट बताई जा रही है। इसके बावजूद माप पुस्तिका में 16,139 किलो स्टील के उपयोग का उल्लेख दर्ज है। इंजीनियरिंग मानकों के जानकारों का कहना है कि इतनी मात्रा का लोहा इस आकार के निर्माण में असामान्य है।

13 लाख के बिल पर उठे सवाल

नगर निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक इस काम की कुल लागत करीब 13.34 लाख रुपये है। ठेकेदार द्वारा लगाए गए बिल को सही ठहराने के लिए भारी मात्रा में स्टील की एंट्री दिखाई गई। वर्क ऑर्डर 25 जून 2025 को जारी हुआ था और हाल ही में काम पूरा बताया गया।

कोर कटिंग बनी जांच की कसौटी

मामला सामने आने के बाद BMC कमिश्नर संस्कृति जैन ने आरसीसी स्ट्रक्चर की कोर कटिंग कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कितना लोहा इस्तेमाल हुआ। जांच का फोकस अब इस बात पर है कि कागजों में दिखाया गया स्टील जमीन पर मौजूद भी है या नहीं।

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इंजीनियरों की भूमिका संदिग्ध

माप पुस्तिका में स्टील की खपत दर्ज करने वाले इंचार्ज असिस्टेंट इंजीनियर निशांत तिवारी और सब-इंजीनियर रूपंकन वर्मा की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं इंचार्ज एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बृजेश कौशल पर आरोप है कि उन्होंने न तो निर्माण की निगरानी की और न ही समय पर जांच रिपोर्ट सौंपी। सूत्रों के अनुसार 5 दिसंबर को नोटिस और 8 दिसंबर को साइट निरीक्षण के बाद भी कोर कटिंग रिपोर्ट आगे नहीं बढ़ाई गई। इसे जानबूझकर देरी करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। AE निशांत तिवारी का दावा है कि रिपोर्ट तैयार कर EE को सौंप दी गई थी।

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अब कार्रवाई की बारी

गोविंदपुरा क्षेत्र के प्रभारी सुपरिटेंडेंट इंजीनियर सुबोध जैन का कहना है कि अभी तक EE स्तर से कोई रिपोर्ट जमा नहीं की गई है। कमिश्नर के निर्देशों के मुताबिक जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। बतादें कि नगर निगम के लिए यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले कोलार क्षेत्र के दानिश कुंज में भी ज्यादा मटेरियल दिखाकर भुगतान कराने का मामला सामने आया था, जहां जांच के बाद दो इंजीनियरों को निलंबित किया गया था।

 



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