जीवाजी विश्वविद्यालय का खेल विभाग एक बार फिर विवादों में है। पिछले माह जयपुर में आयोजित हैंडबाल प्रतियोगिता में भाग लेने गए 14 खिलाड़ियों को अब तक डीए …और पढ़ें

HighLights
- खिलाड़ियों ने टीम मैनेजर पर लगाए गंभीर आरोप।
- एक माह बीत जाने के बाद भी कोई राशि नहीं दी गई।
- टीम मैनेजर अजय सेंगर ने आरोपों से इनकार किया।
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। जीवाजी यूनिवर्सिटी का खेल विभाग एक बार फिर विवादों में है। पिछले माह जयपुर में आयोजित हैंडबाल प्रतियोगिता में भाग लेने गए 14 खिलाड़ियों को अब तक डीए, प्राइज मनी और अन्य देय राशि का भुगतान नहीं किया गया है।
खिलाड़ियों का आरोप है कि प्रति खिलाड़ी करीब 4500 से 5000 रुपये मिलना थे, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई राशि नहीं दी गई।
‘सिर्फ आने-जाने का किराया मिलेगा’
खिलाड़ियों का कहना है कि टीम मैनेजर अजय सेंगर ने स्पष्ट रूप से कहा कि केवल आने-जाने का किराया दिया जाएगा, वह भी टिकट जमा करने के बाद। बाकी राशि कट जाने की बात कही गई।
खिलाड़ी विष्णु राजपूत ने बताया कि पहले प्रतियोगिता से लौटते ही भुगतान हो जाता था, लेकिन इस बार एक माह से टालमटोल की जा रही है। वहीं नितिन दौहरे ने आरोप लगाया कि फोन करने पर भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा।
टीम मैनेजर ने दी सफाई
टीम मैनेजर अजय सेंगर ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि भुगतान रोका नहीं गया है। उनके अनुसार, प्रतियोगिता निजी संस्थान द्वारा आयोजित थी और रहने-खाने का खर्च पहले ही वहन किया जा चुका है। अब नियमानुसार आने-जाने का किराया और अन्य भुगतान किया जाएगा, लेकिन अभी तक खिलाड़ियों ने टिकट प्रस्तुत नहीं किए हैं।
दुर्व्यवहार के भी आरोप
खिलाड़ियों ने यह भी आरोप लगाया है कि टीम मैनेजर उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं और कहते हैं कि उनका चयन ‘जुगाड़’ से हुआ है। इससे खिलाड़ियों का मनोबल गिरता है।
प्रशासन ने मांगी रिपोर्ट
मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने संज्ञान लिया है। कुलसचिव डॉ. राजीव मिश्रा ने कहा कि खेल विभाग से फाइल मंगाकर जांच की जा रही है और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
