मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि जिस ‘वंदे मातरम्’ ने स्वतंत्रता संग्राम में देशवासियों को प्रेरित किया, उसका गायन अब हर कार्यक्रम में किया जाएगा। सीएम ने निर्देश दिए कि प्रदेशभर में स्कूलों, सरकारी समारोहों और अन्य संस्थानों में यह नियम तुरंत लागू किया जाए। उन्होंने इसे अमर शहीदों के प्रति सम्मान और युवा पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने का जरिया बताया। वहीं, इससे पहले स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम् का पालन सभी शैक्षणिक और सरकारी संस्थानों के लिए समान रूप से अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय बच्चों में राष्ट्रवाद की भावना जगाने और स्वतंत्रता संग्राम के महत्व को समझाने के लिए जरूरी है। मुख्यमंत्री के बयान के अनुसार अब वंदे मातरम् के सभी छह छंद हर स्कूल, मदरसा और सरकारी कार्यक्रम में गाए जाएंगे। यह कदम राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि, मुस्लिम समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों का मानना है कि छंदों की कुछ पंक्तियां उनके धार्मिक सिद्धांतों से मेल नहीं खातीं, इसलिए इस पर विचार-विमर्श जारी रहेगा।

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वहीं, दूसरी ओर, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस निर्णय पर आपत्ति जताई। मसूद ने कहा कि विवाद ‘वंदे मातरम्’ के सम्मान को लेकर नहीं है, बल्कि कुछ छंदों के धार्मिक सिद्धांतों से मेल न खाने के कारण है। उन्होंने बताया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस पर अध्ययन कर रहा है और तब तक कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। मसूद ने यह भी कहा कि जो लोग अब इस मुद्दे पर बहस कर रहे हैं, वे संविधान के मूल सिद्धांतों का सम्मान नहीं कर रहे।

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