मध्य प्रदेश में बसों का परमिट जारी किए जाने से लेकर उसकी वैध तिथि निकल जाने के बाद भी परमिट नवीनीकरण नहीं कराया जा रहा है, ऐसी बसों को भी सूचीबद्ध किय …और पढ़ें

HighLights
- बसों के परमिट को लेकर सबसे ज्यादा फोकस
- डेटा का विश्लेषण कर रहा परिवहन विभाग
- संभागीय उड़नदस्ते की मदद से चलेगा अभियान
वरुण शर्मा, नईदुनिया, ग्वालियर। मध्य प्रदेश में परिवहन विभाग अब बिना परमिट, परमिट शर्तों यानी निर्धारित रूट का उल्लंघन कर दौड़ती बसों की जांच का विशेष अभियान 16 फरवरी से चलाने जा रहा है। परिवहन विभाग में नए आयुक्त उमेश जोगा के कार्यभार संभालने के बाद यह निर्णय लिया गया है। बड़े महानगरों इंदौर, जबलपुर, भोपाल और ग्वालियर में परमिट संबंधी शिकायतों की अधिकता है, इसको लेकर डेटा का विश्लेषण भी किया जा रहा है।
परमिट जारी किए जाने से लेकर उसकी वैध तिथि निकल जाने के बाद भी परमिट नवीनीकरण नहीं कराया जा रहा है, ऐसी बसों को भी सूचीबद्ध किया गया है। अलग-अलग जिलों में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी के साथ संभागीय उड़नदस्ते की मदद से परिवहन विभाग यह जांच अभियान चलाएगा।
सीएम दे चुके हैं सख्त कार्रवाई के निर्देश
यह भी हकीकत है कि सामान्य तौर पर जिलों में बिना परमिट व परमिट शर्तों के उल्लंघन को लेकर परिवहन अमला ठोस कार्रवाई नहीं करता है। सीएम भी आफ रूट बसों के संचालन पर प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दे चुके हैं। बता दें कि यात्री बसों में मनमानी को लेकर लगातार शिकायतें क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों से लेकर परिवहन मुख्यालय तक पहुंच रही हैं।
नवंबर 2025 में परिवहन सचिव मनीष सिंह ने परिवहन आयुक्त को अवैध ढंग से संचालित बसों को लेकर पत्र लिखा था। इसके बाद प्रदेश में 899 खटारा बसें चिह्नित की गई थीं। ये वह बसें हैं जिनकी 15 वर्ष की आयु पूर्ण हो चुकी है। इनके परमिट की वैधता अभी समाप्त नहीं हुई है, इस कारण पूरी संभावना है कि ये बसें फील्ड में अब भी अवैध रूप से संचालित हो रही होंगी।
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सभी जिलों में चलेगा अभियान
मधय प्रदेश में यात्री बसों के परमिट जांच, परमिट उल्लंघन व फिटनेस की जांच के लिए विशेष अभियान 16 फरवरी से शुरू किया जाएगा। यात्री सुरक्षा को देखते हुए सभी जिलों में इसे प्रभावी ढंग से चलाया जाएगा। – किरण शर्मा, उपायुक्त, परिवहन विभाग, मप्र।
