देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) में छात्रों की मानसिक सेहत सुधारने के उद्देश्य से प्रस्तावित हैप्पीनेस सेंटर अब तक शुरू नहीं हो सका है। करीब सवा साल पहले इस सेंटर को खोलने का निर्णय लिया गया था, लेकिन आज तक न तो सेंटर की शुरुआत हुई और न ही किसी काउंसलर की नियुक्ति हो पाई है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि प्रस्ताव पास हो चुका है और प्रक्रियाएं जारी हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रगति नजर नहीं आ रही है।

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मानसिक तनाव की घटनाओं के बाद लिया गया था फैसला


बीते कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच मानसिक तनाव बढ़ने और आत्महत्या जैसी घटनाओं के सामने आने के बाद हैप्पीनेस सेंटर खोलने का निर्णय लिया गया था। इसका उद्देश्य छात्रों को तनाव, अवसाद, परीक्षा दबाव और निजी समस्याओं से उबरने में मदद करना था। इस योजना को तत्काल जरूरत मानते हुए कार्यपरिषद में प्रस्तुत किया गया था, जिसे कुलगुरु के साथ पहली या दूसरी बैठक में स्वीकृति भी मिल गई थी।

काउंसलर और मनोवैज्ञानिक की नियुक्ति नहीं


योजना के तहत हैप्पीनेस सेंटर में प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक और काउंसलर नियुक्त किए जाने थे, ताकि छात्र खुलकर अपनी समस्याएं साझा कर सकें। प्रोफेसरों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में देरी गंभीर परिणाम दे सकती है। इसके बावजूद अब तक किसी भी काउंसलर की नियुक्ति या जॉइनिंग नहीं हो पाई है और न ही सेंटर के लिए अलग से स्टाफ तय किया गया है।

सरकारी प्रक्रिया बनी बड़ी बाधा


हैप्पीनेस सेंटर जैसी संवेदनशील योजना भी सरकारी प्रक्रियाओं और लालफीताशाही में उलझ गई है। फाइलें अलग-अलग स्तरों पर घूम रही हैं, लेकिन ठोस नतीजा सामने नहीं आ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत लागू किया जाना चाहिए था, क्योंकि यह सीधे छात्रों की जान और भविष्य से जुड़ा विषय है।

सेंटर की जगह और बजट अब भी तय नहीं


यह प्रस्ताव अक्टूबर 2024 के आसपास पारित किया गया था। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि सेंटर जल्द शुरू हो जाएगा, लेकिन आज तक यह तय नहीं हो पाया है कि हैप्पीनेस सेंटर कहां संचालित होगा। इसके साथ ही कितने काउंसलर या मनोवैज्ञानिक नियुक्त किए जाएंगे, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। बजट, पद स्वीकृति और प्रशासनिक मंजूरी जैसे मुद्दों पर फाइलें अब भी अटकी हुई हैं।

फैकल्टी के लिए भी जरूरी मानी गई थी योजना


यह सेंटर केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि फैकल्टी के लिए भी उपयोगी माना गया था। विश्वविद्यालय में पढ़ाई और प्रशासनिक दबाव के चलते शिक्षक भी मानसिक तनाव का सामना करते हैं। प्रस्ताव में यह भी शामिल था कि जरूरत पड़ने पर फैकल्टी को भी काउंसलिंग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।

फैसले हो चुके, आगे की जानकारी नहीं


इस पूरे मामले पर कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई का कहना है कि हैप्पीनेस सेंटर खोलने को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए जा चुके हैं, लेकिन फिलहाल आगे की प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी नहीं है।



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