इंदौर में खुलेआम सड़कों और प्रमुख चौराहों पर बढ़ती नशाखोरी की घटनाओं ने प्रशासन के सुरक्षा और जागरूकता के दावों पर सवालिया निशान लगा दिया है। शासन द्वारा नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे विभिन्न अभियान धरातल पर निष्प्रभावी साबित हो रहे हैं क्योंकि नशा करने वाले लोग बिना किसी डर के सार्वजनिक स्थानों पर जमावड़ा लगा रहे हैं। हाल ही में जिला कलेक्टर शिवम वर्मा ने एक समीक्षा बैठक के दौरान निर्देश दिए थे कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में नशाखोरी के खिलाफ व्यापक स्तर पर जागरूकता लाई जाएगी। प्रशासन की योजना के अनुसार स्कूल, कॉलेज और पंचायत स्तर पर विशेष नशामुक्ति जागरूकता समितियां गठित करने की तैयारी है, लेकिन इन प्रयासों के बीच जमीनी हकीकत यह है कि नशेड़ियों में कानून का कोई भय दिखाई नहीं दे रहा है।
बायपास और सुपर कॉरिडोर पर नशे का बढ़ता प्रभाव
शहर के बायपास और सुपर कॉरिडोर जैसे इलाके अब नशे के प्रमुख हॉटस्पॉट में तब्दील हो चुके हैं। इन सुनसान क्षेत्रों का लाभ उठाकर लोग शराब की दुकानों से शराब खरीदते हैं और फिर पास के खाली मैदानों या सड़कों के किनारे नशा करने बैठ जाते हैं। चिंताजनक पहलू यह है कि नशाखोरी का यह दौर सुबह से ही शुरू हो जाता है, जिससे वहां से गुजरने वाली महिलाओं और बच्चों को असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। खुले में नशा करने की वजह से इन क्षेत्रों में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे गंभीर आपराधिक घटनाओं की आशंका भी निरंतर बनी रहती है।
पॉश कॉलोनियों और प्रमुख चौराहों की बदहाली
नशाखोरी का यह जाल सिर्फ सुनसान इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के व्यस्त और पॉश क्षेत्रों में भी फैल चुका है। बंगाली चौराहा, नंदा नगर और पीपल्याहाना जैसी विकसित कॉलोनियों में भी शराब दुकानों के आसपास लोग बेरोकटोक नशा करते हुए देखे जा सकते हैं। स्थानीय निवासियों की शिकायत है कि न तो आबकारी विभाग इन दुकानों पर सख्ती कर रहा है और न ही पुलिस प्रशासन द्वारा इन स्थानों पर कोई प्रभावी गश्त की जा रही है। सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने और नशा करने की प्रवृत्ति से न केवल आम नागरिकों का सुकून छिन रहा है, बल्कि इससे शहर के सामाजिक वातावरण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
कलेक्टर बोले हॉटस्पॉट की लिस्टिंग की जाएगी
बढ़ती शिकायतों के बीच कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा है कि नशा समाज और युवाओं के भविष्य के लिए एक अत्यंत गंभीर खतरा है। उन्होंने जोर दिया है कि पुलिस, जिला प्रशासन, शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक समाज को मिलकर एक साझा मोर्चे पर काम करना होगा। कलेक्टर के अनुसार, शहर के उन संवेदनशील इलाकों की सूची तैयार की जा रही है जहां नशाखोरी सबसे अधिक है। इन चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में आने वाले दिनों में विशेष निगरानी रखी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि शहर की कानून व्यवस्था और मर्यादा बनी रहे।
