राजधानी भोपाल में आयोजित दो दिवसीय चीफ जस्टिस कॉन्फ्रेंस का रविवार को समापन हो गया। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत सहित देश के 25 राज्यों के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शामिल हुए। दो दिनी मंथन में मुख्य न्यायाधीशों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि फैसलों में न्यायाधीश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की कोई भूमिका नहीं होगी, इसकी सिर्फ तकनीकी मदद ली जा सकती है। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका को अधिक तेज, प्रभावी और जन-केंद्रित बनाने में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका पर मंथन करना रहा। भोपाल स्थित राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (एनजेए) में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस की एक खास बात यह रही कि दिल्ली के बाद भोपाल दूसरा ऐसा शहर बना, जहां एक साथ सीजेआई, सुप्रीम कोर्ट के 9 न्यायाधीश और देशभर के सभी 25 हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मौजूद रहे। पहले दिन की चर्चा का केंद्र न्यायपालिका में तकनीक और एआई का उपयोग रहा। इस सत्र में सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत सहित सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने अपने विचार रखे।

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एआई से प्रक्रिया तेज होगी

न्यायाधीशों ने इस बात पर सहमति जताई कि एआई का उपयोग मामलों की पेंडेंसी कम करने और प्रक्रियाओं को तेज करने में सहायक हो सकता है। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया कि न्यायिक निर्णय पूरी तरह न्यायाधीशों के विवेक पर ही आधारित रहेंगे और फैसलों में एआई की कोई भूमिका नहीं होगी। एआई को केवल सहायक उपकरण के रूप में अपनाने पर जोर दिया गया।

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सुप्रीम कोर्ट ने बनाई है कमेटी

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका में एआई के उपयोग को लेकर पहले ही एक समिति का गठन किया है, जिसका दिसंबर 2025 में पुनर्गठन किया गया। यह समिति सुप्रीम कोर्ट और अधीनस्थ न्यायालयों में एआई टूल्स के विकास, उपयोग और कार्यान्वयन के लिए रोडमैप तैयार करेगी। इस समिति के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा हैं। भोपाल कॉन्फ्रेंस की थीम “एकीकृत, कुशल और जन-केंद्रित न्यायपालिका” रखी गई थी। इस विषय पर जस्टिस जे.के. महेश्वरी, जस्टिस बी.बी. नागरत्ना, जस्टिस पी. नरसिम्हा, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस जॉय माल्या बागची और जस्टिस विपुल मनुभाई पंचोली ने अलग-अलग पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। चर्चा में डिजिटल नवाचारों के जरिए भाषाई और भौगोलिक बाधाओं को दूर करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

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अदालतों के कामकाज का नियमित मूल्यांकन जरूरी : सीजेआई

देश के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि भारत जैसे बड़े और विविध देश में जन-केंद्रित न्याय व्यवस्था के लिए मामलों का त्वरित निपटारा बेहद जरूरी है। इस दिशा में सूचना एवं संचार तकनीक, डिजिटल उपकरण और एआई न्यायपालिका के काम को अधिक प्रभावी और तेज बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने न्यायिक नीतियों में सुधार और न्यायपालिका के प्रदर्शन के नियमित मूल्यांकन की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

भोपाल से रवाना हुए सभी जज, परिजनों ने किया भ्रमण

कॉन्फ्रेंस के दौरान जहां शीर्ष न्यायाधीश न्यायिक सुधारों और तकनीकी नवाचारों पर विचार-विमर्श में व्यस्त रहे, वहीं उनके परिजनों ने भोपाल और आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। परिजनों ने भीमबैठका की प्राचीन गुफाओं, भोजपुर स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर और ट्राइबल म्यूजियम सहित अन्य दर्शनीय स्थलों को देखा और भोपाल की प्राकृतिक व सांस्कृतिक सुंदरता का अनुभव किया। रविवार दोपहर बाद सभी न्यायाधीश और उनके परिजन भोपाल से रवाना हुए।



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