जो सेब केवल ठंडी वादियों की पहचान माने जाते हैं, वे अब मध्य प्रदेश में ग्वालियर जिले की तपती गर्मियों के बीच भी आकार ले रहे हैं। पनिहार के पास रामपुर …और पढ़ें

HighLights
- ग्वालियर की 45 डिग्री गर्मी में पहली बार लदे रसीले सेब
- रामपुर में हिमाचल की ‘अन्ना’ प्रजाति ने किया कमाल
- आकार में सामान्य और स्वाद में रसीले हैं ग्वालियर के सेब
अनिल तोमर, नईदुनिया, ग्वालियर। जो सेब केवल ठंडी वादियों की पहचान माने जाते हैं, वे अब मध्य प्रदेश में ग्वालियर जिले की तपती गर्मियों के बीच भी आकार ले रहे हैं। पनिहार के पास रामपुर गांव में दो साल पहले लगाए गए हिमाचली सेब के पौधे न केवल पेड़ बने, बल्कि अब फल भी देने लगे हैं। कृषि विभाग ने पनिहार के एक किसान के यहां प्रयोग के तौर पर सेब के ये पौधे लगवाए थे। दरअसल, कृषि विभाग देखना चाहता था कि ठंडे राज्यों के फल के पेड़ ग्वालियर जैसे गर्म क्षेत्र में फल-फूल पाते हैं या नहीं। शुरुआती दौर में ही इस प्रयोग को सफलता मिली है।
सोलन के विज्ञानियों ने गर्म क्षेत्रों के लिए किया है विकसित
अब अन्य किसानों को भी सेब उत्पादन को प्रेरित किया जाएगा। इससे किसान अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि कृषि विज्ञान केंद्र सोलन के विज्ञानियों ने गर्म क्षेत्रों में उत्पादन के लिए अन्ना एप्पल नाम की सेब प्रजाति को विकसित किया है। ग्वालियर में पनिहार के रामपुर गांव के किसान प्रभुदयाल अटल ने इसी प्रजाति के करीब सात पौधे अपने खेत पर लगाए थे। दो साल बाद इस प्रजाति के पौधे न केवल बड़े हो गए, बल्कि पिछले सीजन में फल भी देने लगे। इससे उत्साहित प्रभुदयाल ने और बहुत सारे पौधे मंगाकर खेत पर लगाए। ये पौधे भी बड़े हो गए हैं। इनमें कुछ में फूल भी आ रहे हैं।
हिमाचल में मिली ट्रेनिंग और तकनीकी जानकारी
इसलिए दिलाई गई थी किसानों को ट्रेनिंग: दो साल पहले कृषि विभाग ने आत्मा योजना के तहत ग्वालियर के कुछ प्रगतिशील किसानों को प्रशिक्षण के लिए हिमाचल प्रदेश भेजा। वहां किसानों ने बागवानी विज्ञानियों से सेब की उन विशेष किस्मों के बारे में तकनीकी जानकारी ली, जो कम ठंड के साथ गर्म वातावरण में भी फल देने की क्षमता रखती हैं। प्रशिक्षण से लौटते समय किसान अपने साथ सेब की अन्ना एप्पल प्रजाति के पौधे लेकर आए और खेतों पर रोपा। कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने लगातार इनकी निगरानी की।
45 डिग्री तापमान में भी मीठे और रसीले फल
कृषि विभाग के ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर मलखान सिंह गहलोत ने बताया कि शुरुआती परिणाम बेहद उत्साहजनक हैं। पेड़ों पर लगे सेब न केवल सामान्य आकार के हैं, बल्कि स्वाद में भी काफी मीठे और रसीले हैं। अंचल के तापमान में जहां पारा गर्मियों में 45 डिग्री के पार जाता है, वहां सेब के पौधों का जीवित रहना और फल देना कृषि विज्ञानियों के लिए बड़ी उपलब्धि है। अब दूसरे किसान भी इसका उत्पादन कर पाएंगे।
