मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र धारकुंडी आश्रम के संस्थापक एवं महान संत पूज्य स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज के ब्रह्मलीन होने से संपूर्ण आध्यात्मिक जगत शोक में डूब गया। 102 वर्ष की आयु में उन्होंने मुंबई में उपचार के दौरान दोपहर लगभग 12 बजे अपनी देह त्याग दी। उनके ब्रह्मलीन होने की खबर फैलते ही देश-विदेश में फैले लाखों अनुयायियों और श्रद्धालुओं में गहरी शोक लहर दौड़ गई।
अध्यात्म, तप और सेवा को समर्पित रहा जीवन
स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज ने अपना संपूर्ण जीवन धर्म, तपस्या, सेवा और मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। वे न केवल एक महान संत थे, बल्कि सनातन परंपराओं के सच्चे संवाहक भी माने जाते थे। उनके मार्गदर्शन में लाखों लोगों ने आध्यात्मिक जीवन की राह अपनाई और आत्मिक शांति की अनुभूति की।
1956 में हुई धारकुंडी आश्रम की स्थापना
पूज्य महाराज जी ने 22 नवंबर 1956 को अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन स्वामी परमानंद जी के आशीर्वाद से घने जंगलों के बीच धारकुंडी आश्रम की स्थापना की थी। उस समय यह क्षेत्र निर्जन था, लेकिन वर्षों की कठोर साधना और तप के बल पर यह स्थान आज एक विशाल आध्यात्मिक केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित है।वर्तमान में धारकुंडी आश्रम साधना, सेवा, यज्ञ, प्रवचन और सनातन संस्कृति के संरक्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
चित्रकूट से मिला आध्यात्मिक मार्गदर्शन चार माह पूर्व जब वे चित्रकूट पहुंचे थे, तब उनके दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी थी। इस दौरान पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह सहित अनेक राजने
स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज का गुरुद्वारा चित्रकूट स्थित सती अनसूया आश्रम रहा है। यहीं से उन्होंने आत्मिक चेतना और सनातन धर्म के संदेश को जन-जन तक पहुँचाया। लगभगता, संत और विशिष्टजन उनसे मिलने पहुंचे थे।
अस्वस्थता के चलते मुंबई में चल रहा था इलाज
आश्रम से जुड़े लोगों के अनुसार स्वामी जी पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका उपचार मुंबई के एक अस्पताल में किया जा रहा था, जहाँ उन्होंने अंतिम सांस ली। ब्रह्मलीन होने के पश्चात उनके पार्थिव शरीर को मुंबई के बदलापुर स्थित आश्रम ले जाया गया, जहाँ श्रद्धालुओं को अंतिम दर्शन कराए जा रहे हैं।
शनिवार को धारकुंडी आश्रम लाया जाएगा पार्थिव शरीर
आश्रम प्रबंधन के अनुसार, अंतिम दर्शन के बाद स्वामी जी के पार्थिव शरीर को एयर एंबुलेंस के माध्यम से शनिवार की शाम तक धारकुंडी आश्रम लाया गया, जहां श्रद्धालु उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे।
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सोमवार को समाधि स्थल पर होगा अंतिम संस्कार
आश्रम प्रबंधन ने बताया कि सोमवार को धारकुंडी आश्रम परिसर में स्थित समाधि स्थल पर वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधानपूर्वक स्वामी जी को समाधि दी जाएगी। इस अवसर पर देशभर से संत-महात्मा, शिष्य, अनुयायी और हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
101वें जन्मदिन पर दिया था वर्चुअल दर्शन
उल्लेखनीय है कि 1 जनवरी 2025 को अपने 101वें जन्मदिन के अवसर पर स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज ने बदलापुर आश्रम से वर्चुअल माध्यम से भक्तों को दर्शन दिए थे। उस दौरान देश-विदेश में बसे अनुयायियों ने भावविभोर होकर उनके दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया था।
हमेशा जीवित रहेंगी उनकी शिक्षाएं
पूज्य स्वामी परमहंस सच्चिदानंद जी महाराज भले ही आज भौतिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी शिक्षाएं, साधना, सेवा भाव और आध्यात्मिक संदेश आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। धारकुंडी आश्रम और उनके द्वारा स्थापित सनातन परंपराएं उनके अमूल्य योगदान की सजीव पहचान बनी रहेंगी।

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