मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल की डिजिटल व्यवस्था ने जहां हजारों छात्रों को राहत दी है, वहीं दस्तावेजों में नाम और सरनेम की गड़बड़ी अब सैकड़ों फार्मेसी विद्यार्थियों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। अलग-अलग दस्तावेजों में अलग नाम लिखवाने वाले छात्रों के आवेदन डिजिलॉकर में लगातार रिजेक्ट हो रहे हैं, जिससे उन्हें बार-बार काउंसिल और आरबीसी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। दरअसल, फार्मेसी काउंसिल ने ऑनलाइन प्रणाली के जरिए पंजीयन प्रमाणपत्र को ई-मेल और डिजिलॉकर के माध्यम से उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की है। इससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हुई है, लेकिन नाम में जरा-सी भी मिसमैच होने पर सिस्टम आवेदन स्वीकार नहीं कर रहा।

Trending Videos

11 हजार से घटकर 800 रह गई पेंडेंसी

मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार भव्या त्रिपाठी ने बताया कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और डिजिलॉकर व्यवस्था लागू होने के बाद लंबित मामलों का तेजी से निपटारा हुआ है। उन्होंने बताया कि जहां पहले 11 हजार से ज्यादा आवेदन पेंडिंग थे, अब यह संख्या घटकर करीब 800 रह गई है। ये वही मामले हैं, जिनमें छात्रों के दस्तावेजों में नाम, सरनेम या स्पेलिंग अलग-अलग दर्ज है।

यह भी पढ़ें-होली पर यात्रियों को राहत,भोपाल-रानी कमलापति से रीवा के लिए 5 स्पेशल ट्रेनें,मार्च तक होगा संचालन

अधिकारी सख्त, अब कोई ढील नहीं

काउंसिल अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा है कि अब किसी भी तरह की गड़बड़ी स्वीकार नहीं की जाएगी। अगर फार्मेसी काउंसिल से रजिस्ट्रेशन कराना है, तो सभी दस्तावेजों में नाम पूरी तरह एक जैसा होना अनिवार्य है। अधिकारियों के मुताबिक अब यह नहीं चलेगा कि कहीं शर्मा लिखा है और कहीं वर्मा। सिस्टम पूरी तरह ऑटोमैटिक है और नियमों से समझौता नहीं होगा।

यह भी पढ़ें-भोपाल में लापरवाह अफसर-कर्मचारियों की कटेगी सैलरी, कमिश्नर का अल्टीमेटम

छात्रों की बढ़ी दौड़भाग

नाम मिसमैच के चलते कई छात्र अपने आवेदन सुधारने के लिए लगातार विभागों के चक्कर लगा रहे हैं। काउंसिल का कहना है कि छात्र पहले अपने सभी शैक्षणिक और पहचान संबंधी दस्तावेज दुरुस्त कर लें, तभी आवेदन करें।डिजिटल व्यवस्था ने जहां प्रक्रिया को तेज किया है, वहीं अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई है। 

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *