इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से लगातार मौतें हो रही है। दूषित पानी की सप्लाई के कारण डायरिया होने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने बस्ती में गंभीर से बीमार लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया था। उन्हीं में से एक 70 वर्षीय अलगूराम यादव की मौत हो गई। वे एक माह से अस्पताल में भर्ती थे और कुछ दिनों से वेंटिलेटर पर थे। उन्हें सांस लेने में दिक्कत आ रही थी।

 

गुरुवार रात उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई और तड़के उनकी मौत हो गई। अलगू 9 जनवरी से अरबिंदो अस्पताल में भर्ती थे। परिजनों का कहना है कि उन्हें कोई दूसरी बीमारी नहीं थे। उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद उन्हें बस्ती के क्लिनिक में दिखाया गया था।

वहां से उन्हें अरविंदो अस्पताल में रैफर किया गया था। अभी भी बस्ती के दो मरीज गंभीर रूप से बीमार है और वे अस्पताल में भर्ती है। अब तक भागीरथपुरा के चार सौ से ज्यादा मरीज अस्पताल में इलाज करा कर ठीक हो चुके है, जबकि 33 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें छह माह का मासूम आव्यान भी शामिल है।

 

दूषित पानी से ज्यादातर महिलाओं की मौतें हुई है। ज्यादातर को डायरिया के साथ दूसरी बीमारियां भी थी। बस्ती में हुई मौतों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगी है और अफसरों ने डायरिया की वजह से 16 लोगों की मौत होना स्वीकारा है। अभी भी बस्ती में लोग नर्मदा लाइन का पानी भरने से डर रहे है, क्योंकि सप्लाई पुरानी लाइनों से ही हो रही है। बस्ती के एक हिस्से में नर्मदा लाइन बिछाई गई है। उससे 30 प्रतिशत इलाका ही कवर हो रहा है। बस्तीवालों का कहना है कि पुरानी लाइनों में सीवरेज का पानी मिलने के कारण ही लोग बड़ी संख्या में बीमार हुए। टंकी से दूसरी बस्तियों में भी पानी सप्लाई होता है, लेकिन वहां परेशानी नहीं हुई है।

 

 

 



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