प्रकृति और आध्यात्म के विविध रंगों का संगम
अपनी कला यात्रा और इस आगामी प्रदर्शनी के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए हेमशंकर पाठक ने बताया कि उन्होंने इन तस्वीरों के माध्यम से प्रकृति, धर्म और आध्यात्म के अनूठे पहलुओं को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास किया है। पाठक के कैमरे की नजर से कहीं भगवान बुद्ध की गहरी ध्यान मुद्रा के दर्शन होते हैं, तो कहीं जंगल के राजा शेर का रौद्र और राजसी स्वरूप दिखाई देता है। उनकी तस्वीरों के संग्रह में जहां एक ओर प्रकृति की अद्भुत हरियाली की छटा बिखरी हुई है, वहीं दूसरी ओर विशाल पहाड़ों की अडिग खूबसूरती को भी बहुत ही खूबसूरती से कैद किया गया है। पाठक का मानना है कि उनकी खींची गई हर एक तस्वीर अपने आप में एक संपूर्ण कहानी है, जिसे समझने के लिए केवल एक पारखी नजर की आवश्यकता है।
तस्वीरों के माध्यम से सामाजिक संदेश का प्रयास
प्रदर्शनी के मुख्य उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए पाठक ने कहा कि तस्वीरें वास्तव में बोलती हैं। उनके अनुसार, यदि कोई दर्शक किसी तस्वीर को एकाग्रता और ध्यान से देखे, तो उसे अनुभव होगा कि वह तस्वीर बिना कुछ कहे ही लाखों शब्दों के बराबर की बात कह देती है। उन्होंने साझा किया कि उनका सदैव यह प्रयास रहता है कि वे अपनी हर क्लिक के माध्यम से समाज को एक सार्थक और सकारात्मक संदेश दे सकें। यह प्रदर्शनी न केवल फोटोग्राफी के छात्रों के लिए सीखने का एक अच्छा अवसर है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी कला के माध्यम से जीवन को देखने का एक नया नजरिया पेश करती है।


