नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: सिथौली स्थित रेल स्प्रिंग फैक्ट्री में गुरुवार को मशीनों का मेंटेनेंस करते समय एलपीजी गैस के रिसाव से तेज धमाका हो गया। पाइपलाइन से रिस रही गैस किसी चिंगारी के संपर्क में आ गई, जिससे आग लग गई। धमाके के साथ आग फैलने से मशीनों की मरम्मत में लगे पांच कर्मचारी झुलस गए।

घटना के बाद कर्मचारियों को तत्काल सिथौली स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। हादसे में दो कर्मचारियों के चेहरे, हाथ और पैर बुरी तरह झुलस गए हैं, जबकि तीन अन्य कर्मचारियों के हाथ-पैर जलने की जानकारी है।

अप्रशिक्षित कर्मचारियों से कराया जा रहा था काम

जानकारी के अनुसार, सिथौली स्प्रिंग फैक्ट्री में लगी भारी मशीनों के एनुअल मेंटेनेंस का ठेका मैसर्स ताइकिशा कंपनी को दिया गया है। इस कार्य के लिए करीब 11 करोड़ रुपये की राशि तय की गई है। इसके बावजूद कंपनी पर मेंटेनेंस कार्य में लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।

गुरुवार को मशीनों के मेंटेनेंस के लिए अप्रशिक्षित कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी गई थी। ये कर्मचारी एंड टेपर मशीन को खोलने का कार्य कर रहे थे, जो पिछले चार माह से खराब पड़ी हुई थी।

LPG पाइपलाइन से जुड़ी थी मशीन

जिस मशीन पर काम किया जा रहा था, उसके पास ही एलपीजी की पाइपलाइन लगी हुई है। यह पाइपलाइन कारखाने में मौजूद 200 टन एलपीजी स्टोरेज क्षमता से जुड़ी हुई है। पाइपलाइन से गैस का रिसाव हो रहा था, जिसकी जानकारी के बावजूद काम जारी रखा गया।

जैसे ही मशीन खोलने के दौरान चिंगारी निकली, रिस रही गैस ने आग पकड़ ली। आग के साथ जोरदार धमाके जैसी आवाज आई और पास में काम कर रहे कर्मचारी साबिर खान, अमर सिंह, कौशल श्रीवास्तव, योगेश और हेमंत चौबे झुलस गए। इसमें साबिर खान और कौशल श्रीवास्तव के चेहरे बुरी तरह झुलस गए हैं।

कर्मचारियों की सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

हादसे के बाद फैक्ट्री में मौजूद कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य एलपीजी सप्लाई बंद कर दी। साथ ही अग्निशमन यंत्रों की मदद से आग पर काबू पाया गया। यदि आग मुख्य टैंकों तक पहुंच जाती, तो बड़ा नुकसान हो सकता था।

चार बुलेट टैंकों में होता है एलपीजी का भंडारण

कारखाने में चार बड़े एलपीजी बुलेट टैंक मौजूद हैं, जिनमें कुल 200 टन एलपीजी का भंडारण रहता है। इनमें दो टैंक 80-80 टन क्षमता के हैं, जबकि दो टैंक 20-20 टन क्षमता के हैं। इन्हीं टैंकों से पाइपलाइन के माध्यम से कारखाने में एलपीजी की आपूर्ति होती है, जिसका उपयोग स्प्रिंग निर्माण में लोहे को गर्म करने के लिए किया जाता है।

पुलिस जांच में जुटी, अधिकारी मौन

घटना की सूचना मिलने पर झांसी रोड थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। वहीं इस पूरे मामले में रेलवे के जिम्मेदार अधिकारी कुछ भी कहने से बचते नजर आए।

मैंने दो फरवरी को ही काम ज्वाइन किया है। अभी तो मैं काम समझ ही रहा था। हम मशीन को खोलने का काम कर रहे थे। इसी दौरान एलपीजी रिसाव से अचानक तेज धमाके से आग लग गई। इससे मैं, कौशल श्रीवास्तव सहित अन्य कर्मचारी झुलस गए।

-साबिर खान, घायल कर्मचारी।



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