मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पिछले एक सप्ताह से रुक-रुक कर बूंदाबांदी हो रही है, लेकिन मंगलवार को जिले के कछुआ गांव में हुई मूसलाधार ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी। इस प्राकृतिक आपदा से हजारों हेक्टेयर में खड़ी गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। फसल क्षति का निरीक्षण और सर्वे करने पहुंचीं नायब तहसीलदार और किसानों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई, जिसका वीडियो बुधवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

ओलावृष्टि के बाद नायब तहसीलदार पूजा मावई जब वाहन से उतरीं, तो उन्होंने किसानों से किनारे हटने को कहा। जब किसानों ने अपनी पीड़ा बताने की कोशिश की, तो नायब तहसीलदार ने कहा, “साइड हो जाओ… साइड हो जाओ, मुझसे बात करने का यह तरीका नहीं है।”

एसडीएम को आना पड़ा

नायब तहसीलदार की इस प्रतिक्रिया से किसान नाराज हो गए और उन्होंने कहा कि उन्हें सर्वे नहीं कराना है और अधिकारी वापस जाएं। मामला बिगड़ता देख वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई। इसके बाद भितरवार एसडीएम राजीव समाधिया स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने नाराज किसानों को शांत कराया और नायब तहसीलदार को साथ लेकर खेतों में जाकर सर्वे की प्रक्रिया शुरू करवाई।

भीषण ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलें

बताया जा रहा है कि मंगलवार को ग्वालियर जिले के एक दर्जन से अधिक गांवों में भीषण ओलावृष्टि हुई, जिससे किसानों की फसलें पूरी तरह तबाह हो गईं। भितरवार और डबरा क्षेत्र के कछुआ गांव में सबसे अधिक नुकसान हुआ। यहां करीब आधे घंटे तक ओलावृष्टि होती रही, जिससे सड़कों और खेतों में बर्फ की सफेद चादर बिछ गई।ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसी भयावह ओलावृष्टि पहले कभी नहीं देखी। गांव के लोग दहशत में आ गए और बच्चे रोते नजर आए।



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