भागीरथपुरा में रहने वाले एक मरीज को परिजन अब अस्पताल से डिस्चार्ज कराकर घर ले गए। वे 25 दिनों से निजी अस्पताल में भर्ती थे। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। परिजनों का कहना है कि उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। अभी भी बस्ती के तीन रहवासी अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। अब बस्ती में डायरिया के इक्का-दुक्का मरीज निकल रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। अभी भी बस्ती का आयुष्मान क्लिनिक 24 घंटे खुला रखा जा रहा है।
दूषित जल के शिकार पार्वती बाई, अनिता कुशवाह और अशोक मौर्य अभी भी बॉम्बे अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती हैं। भागीरथपुरा बस्ती में डेढ़ हजार से ज्यादा लोग दूषित पानी से प्रभावित हुए थे, जिनमें से 400 मरीज अस्पताल में भर्ती कराए गए थे। अब तक दूषित पानी के कारण 30 लोगों की मौत हो चुकी है हालांकि, सरकार ने 16 लोगों की मौत की वजह उल्टी दस्त मानी है और शासन की तरफ से दो-दो लाख रुपये परिजनों को दिए गए हैं।
परिजनों ने बनाया संघ
भागीरथपुरा में जिन परिवारों में दूषित पानी के कारण मौतें हुई हैं, उन्होंने भागीरथपुरा पीड़ित परिवार सर्व विकास संघ बनाया है। संघ के ज्यादातर परिवारों के सदस्य लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मिले थे। शुक्रवार को पीड़ित परिवारों ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा के नीचे धरना दिया। उनके साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी थे। पीड़ितों ने मांग करते हुए कहा कि जिन लोगों की मौत दूषित पानी के कारण हुई है, उनके परिवार के एक सदस्य को सरकार नौकरी दें। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि अब जो मौतें हो रही हैं, उनकी वजह स्वास्थ्य विभाग दूषित पानी से नहीं मान रहा है।
