राजधानी भोपाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण के दौरान मतदाता सूची की शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए फर्जी आपत्तियां दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह गहराया है। कोटरा सुल्तानाबाद इलाके में रहने वाले लीलाधर के नाम से मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए सात आपत्तियां दर्ज कराई गईं, जबकि लीलाधर ने ऐसी किसी भी आपत्ति से साफ इनकार किया है। 

मोबाइल नंबर भी फर्जी, जांच में नए खुलासे

फर्जी आपत्तियों में तकनीकी गड़बड़ियां भी सामने आई हैं। एक मामले में फॉर्म-7 में आपत्तिकर्ता का नाम अलग दर्ज है, जबकि मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति का पाया गया। दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में विकास सिंह के नाम से दर्ज आपत्ति में मोबाइल नंबर एक भाजपा नेता का निकला, जिन्होंने किसी भी तरह की आपत्ति दर्ज करने से इनकार किया है।

जिलेभर में 10 हजार से ज्यादा आपत्तियां

जिला प्रशासन के अनुसार, भोपाल की सात विधानसभा क्षेत्रों में अब तक 10,143 फार्म-7 (नाम हटाने के लिए) प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा:80,892 फार्म-6 (नए नाम जोड़ने के लिए) 47,493 फार्म-8 (संशोधन के लिए) दर्ज किए गए हैं। कुल मतदाताओं की संख्या 21.25 लाख से अधिक है।

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स्टैंडिंग कमेटी में उठा मामला

फर्जी आपत्तियों के बीच शुक्रवार को विशेष रोल पर्यवेक्षक श्रुति सिंह की अध्यक्षता में जिला स्टैंडिंग कमेटी की बैठक हुई। बैठक में सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और मतदाता सूची को शुद्ध व पारदर्शी बनाए रखने पर जोर दिया गया। श्रुति सिंह ने कहा कि शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की रीढ़ है और यह सुनिश्चित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न हो।

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कलेक्टर बोले- बिना जांच नहीं कटेगा नाम

कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने साफ कहा कि फार्म-7 के तहत प्राप्त सभी आपत्तियों की बीएलओ और एआरओ स्तर पर भौतिक जांच कराई जा रही है। मतदाता नहीं मिलने पर नोटिस जारी कर पक्ष सुना जाता है।उन्होंने कहा, किसी भी मतदाता को घबराने की जरूरत नहीं है। बिना पूरी जांच के किसी का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा। SIR में गड़बड़ियों को लेकर कांग्रेस भी हमलावर हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने बड़ी संख्या में नाम हटाने पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर जांच और सुधार की मांग की है।

 



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