मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया है कि SIR की आड़ में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। उनका दावा है कि प्रदेश सहित 12 राज्यों में चल रही इस प्रक्रिया में करीब 43 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।पीसीसी कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान वर्मा ने कहा कि SIR प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ लेवल अधिकारी (BLO) एक ही दिन में दर्जनों फॉर्म भरवा रहे हैं, जो तय प्रक्रिया के खिलाफ है। इसके साथ ही, एक ही नाम की प्रिंटेड मतदाता सूची राजनीतिक कार्यकर्ताओं तक पहुंचने का आरोप भी लगाया गया।

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कमजोर वर्गों को किया जा रहा टारगेट?

सज्जन वर्मा ने दावा किया कि इस पूरी कवायद में अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं के नाम disproportionately हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास पूरी मतदाता सूची उपलब्ध है, लेकिन निर्वाचन आयोग नाम साझा करने के बजाय सिर्फ आंकड़े बता रहा है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

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चुनाव आयोग की भूमिका पर उठे सवाल

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मतदाताओं की मौजूदगी में ही आपत्तियां दर्ज कर फॉर्म भरवाए जा रहे हैं और पूरी प्रक्रिया राजनीतिक प्रभाव में चलाई जा रही है। वर्मा ने स्पष्ट कहा कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम नहीं कटना चाहिए और मताधिकार से वंचित करना संविधान के खिलाफ है।

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FIR और आंदोलन की चेतावनी

कांग्रेस ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए निर्वाचन आयोग के दो अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि गड़बड़ियों पर तुरंत रोक नहीं लगी, तो पार्टी इसे लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बनाकर सड़क से सदन तक उठाएगी।



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