दौर के एबी रोड के छह किलोमीटर हिस्से में सरकार ने एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने का फैसला लिया है। इसे लेकर गुरुवार को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की। यह कॉरिडोर किस तरह बनेगा, इसे लेकर मंथन हुआ।

 

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इंदौर के विशेषज्ञों ने कहा कि छह किलोमीटर लंबा ब्रिज एलआईजी शॉपिंग कॉम्प्लेक्स से नवलखा चौराहे तक बनना है, लेकिन इस दूरी के लिए पूरे मार्ग का मात्र दस प्रतिशत ट्रैफिक ही एलिवेटेड कॉरिडोर से गुजरेगा। बैठक में यह भी बताया गया कि इस कॉरिडोर की तीन भुजाएं भी अलग-अलग चौराहों पर उतरेंगी। उधर, एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर हाईकोर्ट में याचिका भी लग गई है, जिसमें इसकी उपयोगिता पर सवाल उठाए गए हैं।

बैठक में मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जाए और इस तरह की प्लानिंग हो कि यह ज्यादा से ज्यादा उपयोगी रहे। पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि आने वाले समय में यह कॉरिडोर जरूरी होगा, लेकिन इसका निर्माण भी समय सीमा में होना चाहिए, क्योंकि एबी रोड पर ट्रैफिक का दबाव बहुत ज्यादा रहता है। सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि पलासिया चौराहे से मेट्रो का अंडरग्राउंड ट्रैक भी जाना है, अतः इसके हिसाब से ही प्लानिंग की जाए।

 

13 साल पहले मंजूर हुआ था प्रोजेक्ट एलिवेटेड कॉरिडोर का प्रोजेक्ट तत्कालीन केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने मंजूर किया था और इसके लिए तब 100 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन उस समय बीआरटीएस बनाया जा रहा था, इस कारण प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया।



प्रोजेक्ट मंजूर होने के कारण इसे दो साल पहले फिर बनाने का फैसला लिया गया और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसका भूमिपूजन भी किया था। हालांकि, साल भर पहले हुई शहर विकास की बैठक में मुख्यमंत्री ने सर्वे में कम ट्रैफिक का हवाला देते हुए इसे निरस्त कर दिया था, लेकिन इस बार की बैठक में फिर इसके निर्माण की संभावना पर जोर दिया गया है।



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