देश के 243 साइबर योद्धा अब नीट यूजी-पीजी, आइआइटी जेईई मेंस सहित अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं पर डिजिटल निगरानी रखेंगे। मध्य प्रदेश के भी छह साइबर …और पढ़ें

HighLights
- केंद्रीय स्तर पर यह कदम उठाया गया
- छह माह का प्रशिक्षण दिया गया
- डिजिटल निगरानी की जिम्मेदारी मिली
अमित मिश्रा, नईदुनिया ग्वालियर। देश के 243 साइबर योद्धा अब नीट यूजी-पीजी,आइआइटी जेईई मेंस सहित अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं पर डिजिटल निगरानी रखेंगे। परीक्षाओं में होने वाली हैकिंग, सर्वर पर मालवेयर अटैक, पेपर लीक सहित तमाम धांधलियों को रोकने के लिए केंद्रीय स्तर पर यह कदम उठाया गया है।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन मेडिकल साइंस द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में साइबर कमांडो निगरानी करेंगे। मध्य प्रदेश के भी छह साइबर योद्धा इसमें शामिल हैं।
क्यों उठाया गया यह कदम?
यह कदम इसलिए उठाया जा रहा है, क्योंकि अब अधिकांश परीक्षाएं ऑनलाइन ही होती हैं। इसलिए मालवेयर अटैक और हैकिंग के जरिये साइबर अपराधी सर्वर को टारगेट कर सकते हैं। इसलिए अब साइबर कमांडो को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। पहले राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख परीक्षाओं में साइबर कमांडों से निगरानी कराई जा रही है। आने वाले समय में राज्यों में होने वाली परीक्षाओं की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर होगी।
परीक्षाएं जिनमें पेपर लीक हुआ
- मप्र में एनएचएम भर्ती परीक्षा में तीन साल पहले पर्चा लीक हो गया था। डिजिटल निगरानी कमजोर थी। इसलिए प्रश्न पत्र बनाने वाली संस्था के सर्वर से ही पर्चा लीक हो गया था।
- 2024 में नीट यूजी पेपर लीक कांड भी देश में हुआ था। बिहार से झारखंड तक इस कांड के तार जुड़े थे। बाद में जांच सीबीआइ को सौंपी गई थी।
ऐसे काम करेंगे साइबर कमांडो
- परीक्षा केंद्रों के सभी कंप्यूटर को सेंट्रलाइज्ड सिस्टम मॉनिटर करने वाले सॉफ्टवेयर, सर्वर की निगरानी।
- मोबाइल या अन्य डिवाइस के जरिये इंटरनेट की मदद से धांधली रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों पर जैमर, डिवाइस ट्रैकिंग तकनीक का इस्तेमाल।
- एआइ थ्रेट इंटेलिजेंस का उपयोग, सर्वर पर किस तरह के मालवेयर का अटैक हो सकता है, क्या-क्या खतरे हो सकते हैं, इसे भांपना और इसके लिए सुरक्षा कवच तैयार करना।
- परीक्षा कराने वाली संस्था के सॉफ्टवेयर से लेकर प्रश्न-पत्र बनाने वाली संस्था के सॉफ्टवेयर व सर्वर की डिजिटल निगरानी
- डाटा की सुरक्षा के लिए जरूरी तकनीक का उपयोग करेंगे।
कौन हैं साइबर कमांडो
देश में साइबर अपराध अब सबसे बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए 2024 में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा आइ4सी (इंडियन साइबर क्राइम को-आर्डिनेशन सेंटर) द्वारा पांच हजार साइबर कमांडो तैयार करने का निर्णय लिया गया। अलग-अलग राज्यों की पुलिस एवं जांच एजेंसियों से साइबर कमांडो के प्रशिक्षण के लिए जवानों का चयन किया गया। इन्हें आइआइटी जैसे संस्थानों में छह माह का प्रशिक्षण दिया गया।
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मप्र के भी छह पुलिसकर्मियों ने ट्रेनिंग ली
मध्य प्रदेश के भी छह पुलिसकर्मियों ने साइबर कमांडो की ट्रेनिंग आइआइटी कानपुर में ली। अब इन्हें सरकारी विभागों के सर्वर, बैंक के सर्वर, सेनाओं के सर्वर की सुरक्षा से लेकर अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। अब परीक्षाओं की डिजिटल निगरानी की जिम्मेदारी मिली है।
राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की डिजिटल निगरानी अब साइबर कमांडो करेंगे। देश के कुल 243 साइबर कमांडो में मप्र के भी छह साइबर कमांडो शामिल हैं। अब राज्य की परीक्षाओं की डिजिटल निगरानी भी कराई जाएगी, जिससे किसी भी तरह की धांधली न हो सके।
-प्रणय नागवंशी, एसपी, राज्य साइबर पुलिस
