उज्जैन। देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक नया नियम इन दिनों सियासत, समाज और सोशल मीडिया पर बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। जिसका देश भर में विरोध किया जा रहा है। आज धार्मिक नगरी उज्जैन में भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के इस नए कानून का जमकर विरोध किया। उज्जैन में आज टॉवर चौक पर सवर्ण समाज के लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और इस काले कानून को वापस लेने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान पं सुरेंद्र चतुर्वेदी, अ.भा ब्राह्मण समाज अध्यक्ष और पं महेश शर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष अ.भा. पुजारी महासंघ ने यूजीसी कानून पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि समानता के नाम पर लाया गया कोई भी कानून अगर असमानता का भय पैदा करे तो उस पर पुनर्विचार जरूरी है। 21वीं सदी जातिवाद की समाप्ति का समय है। हिंदू समाज की एकता और अखंडता बनाए रखने की जरूरत है। सरकार को जल्द इस मुद्दे पर सकारात्मक फैसला लेना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान यह हुआ
टॉवर चौक पर UGC के नए कानूनों को लेकर प्रदर्शन हुआ। इस दौरान सवर्ण समाज ने काला कानून वापस लो के नारे लगाए। इस दौरान बटुकों ने हाथो में तख़्ती बैनर लेकर यूजीसी के नये कानून के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया।
छात्रों ने हाथों में पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया
आज प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने यूजीसी के नए बिल को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने हाथों में पोस्टर लेकर धरना दिया। छात्रों ने यूजीसी रोल बैक की जमकर नारेबाजी की। नए बिल को ‘विभाजनकारी’ और ‘काला कानून’ बताया है। आरोप लगाया कि शिक्षा का निजीकरण और छात्रों के बीच बंटवारा करने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने यूजीसी बिल को लेकर केंद्र सरकार से दखल दिए जाने की मांग की है। छात्रों ने कहा कि अगर यूजीसी ने जल्द बिल वापस नहीं लिया तो छात्र सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
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क्या है UGC और उसका नया रेगुलेशन?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, समान अवसर और नियमन से जुड़ी शीर्ष संस्था है। इसी आयोग ने 15 जनवरी 2026 से देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू कर दिए हैं। इस नियम का मकसद कैंपस में जातिगत भेदभाव को रोकना और सभी वर्गों के लिए समान, सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना बताया गया है।
नए कानून में क्या है?
अब तक उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव से जुड़ी शिकायतें मुख्य रूप से एससी और एसटी समुदाय तक सीमित मानी जाती थीं। नए रेगुलेशन के तहत ओबीसी वर्ग को भी स्पष्ट रूप से जातिगत भेदभाव की श्रेणी में शामिल कर लिया गया है। इसका मतलब यह है कि अब ओबीसी छात्र, शिक्षक और कर्मचारी भी अपने साथ होने वाले उत्पीड़न या भेदभाव की शिकायत आधिकारिक रूप से दर्ज करा सकेंगे।
