भिंड जिले की आलमपुर तहसील से लगभग 50 मीटर की दूरी पर मुख्य हाईवे से लगी चरनोई की चार बीघा शासकीय भूमि (सर्वे नंबर 928) पर पिछले 30–35 वर्षों से अतिक्रमण किया गया था। जमीन की अनुमानित कीमत तीन करोड़ आंकी गई है। नायब तहसीलदार न्यायालय द्वारा अतिक्रमणकर्ता को विधिवत नोटिस जारी कर बेदखली का आदेश पारित किया गया था, लेकिन इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया।

इसके बाद एसडीएम लहार के निर्देशन में बुधवार को तहसीलदार दीपक शुक्ला, नायब तहसीलदार महेश माहौर, राजस्व अमला एवं पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। कार्रवाई के दौरान एसडीएम लहार विजय सिंह यादव स्वयं उपस्थित रहे। नगर पालिका से जेसीबी बुलवाकर सबसे पहले चार बीघा भूमि पर खड़ी फसल को नष्ट कराया गया। साथ ही सड़क किनारे अतिक्रमणकर्ता द्वारा की गई तार फेंसिंग को भी जेसीबी की सहायता से हटाकर नष्ट किया गया।

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अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब शासकीय चरनोई भूमि पर बड़ी संख्या में गौमाता चरने पहुंच गईं। इससे ग्रामीणों में संतोष का माहौल देखा गया। इस बीच आलमपुर हल्के में पदस्थ पटवारी संजीव जाटव की लापरवाही सामने आई। अतिक्रमण हटाने की जानकारी लेने पर पता चला कि पटवारी बिना सूचना के मुख्यालय से अनुपस्थित थे। इस पर एसडीएम लहार विजय सिंह यादव ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पटवारी संजीव जाटव को हटाकर तहसील मुख्यालय लहार अटैच करने के निर्देश दिए तथा आलमपुर तहसील का अतिरिक्त प्रभार पंचम कुशवाहा को सौंपा।

एसडीएम लहार ने नायब तहसीलदार महेश माहौर को सख्त निर्देश दिए कि चरनोई प्रवृत्ति की एवं मुख्य मार्गों से लगी अन्य बेशकीमती शासकीय भूमि को आगामी सात दिवस के भीतर चिन्हित कर नोटिस जारी करते हुए विधिवत सुनवाई के बाद अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए, ताकि गौमाता के चराई क्षेत्र एवं भविष्य में शासकीय संरचनाओं के निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध हो सके और क्षेत्र के विकास को गति मिल सके।

 

 



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