मध्य प्रदेश में मदरसों में नैतिक शिक्षा के तौर पर भगवद गीता पढ़ाने के सुझाव ने सियासी बहस छेड़ दी है। पुलिस ट्रेनिंग से जुड़ी इस पहल को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। भोपाल के हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस प्रस्ताव का खुलकर बचाव करते हुए इसे सामाजिक और नैतिक मजबूती से जोड़ा है।

गीता धर्म नहीं, जीवन दर्शन

विधायक रामेश्वर शर्मा का कहना है कि गीता को केवल धार्मिक ग्रंथ के रूप में देखना गलत है। यह ऐसा दर्शन है, जो आत्मबल बढ़ाता है, सामाजिक समरसता सिखाता है और अन्याय व अपराध के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता है।

उर्दू पढ़ाई जा सकती है, तो गीता क्यों नहीं? रामेश्वर शर्मा ने सवाल उठाया कि जब मदरसों में हिंदू बच्चों को उर्दू सिखाई जा सकती है, तो गीता पढ़ाने पर आपत्ति क्यों जताई जा रही है। उनके मुताबिक, गीता किसी एक समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए मार्गदर्शक ग्रंथ है।

यह भी पढ़ें-मध्य प्रदेश में जहरीले पानी पर सियासत तेज, सड़क पर उतरेगी यूथ कांग्रेस, 28 से शुरू होगी पदयात्रा

हर नागरिक के लिए जरूरी नैतिक शिक्षा

उन्होंने कहा कि गीता का संदेश कर्तव्य, कर्म और नैतिकता पर आधारित है, जो आज के दौर में हर नागरिक के लिए जरूरी हो गया है। गीता पढ़ी भी जानी चाहिए और पढ़ाई भी जानी चाहिए।

यह भी पढ़ें-उमा भारती के ट्वीट से सियासी हलचल, पहले प्रशासन पर सवाल; फिर योगी सरकार के समर्थन में सफाई

पुलिस ट्रेनिंग से शुरू हुई पहल

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के पुलिस ट्रेनिंग स्कूलों में नए आरक्षकों के लिए गीता पाठ को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के सभी आठ ट्रेनिंग सेंटरों में यह सत्र ‘अनुशासित और नैतिक जीवन’ की सीख देने के उद्देश्य से आयोजित किए जाएंगे। दरअसल नवंबर 2025 में मध्य प्रदेश पुलिस एडीजी (ट्रेनिंग) राजाबाबू सिंह ने नया निर्देश जारी किया है, जिसके तहत अब सभी प्रशिक्षण केंद्रों में रंगरूट भगवद् गीता का पाठ करेंगे, ताकि वो धार्मिक जीवन जीना सीख सकें। एडीजी (ट्रेनिंग) राजाबाबू सिंह ने आदेश दिया है कि भगवान कृष्ण के पवित्र महीने यानी अगहन के दौरान गीता के कम से कम एक अध्याय का पाठ शुरू किया जाए। इस आदेश के बाद दैनिक ध्यान सत्र से पहले गीता का पाठ कराया जा रहा है। 

 



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *