MP में अन्नदाताओं के लिए वरदान बनी मावठ की बारिश …और पढ़ें

HighLights
- मावठ से फसलों की एक सिंचाई की जरूरत पूरी, यूरिया भी नहीं देना पड़ेगा
- कृषि विशेषज्ञों ने कहा- पाला नहीं पड़ा तो होगा रिकॉर्ड उत्पादन
- दाना अधिक पुष्ट और चमकीला होगा, इल्लियों से मिलेगी राहत
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। प्रदेश के ग्वालियर-चंबल और मालवा सहित विभिन्न इलाकों में पिछले चौबीस घंटों के दौरान हुई मावठ की बारिश ने न केवल मौसम में सिहरन बढ़ाई, बल्कि किसानों के चेहरों पर मुस्कान भी बिखेर दी है। इस वर्षा ने गेहूं, चना सहित अन्य फसलों में एक सिंचाई और सरसों की फसल में यूरिया की जरूरत को पूरा कर दिया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाला नहीं पड़ता तो फसल उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। गेहूं की फसल में आमतौर पर तीन-चार बार सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है।
वर्तमान में सिंचाई की सख्त जरूरत थी, जिसे मावठ की बारिश ने पूरी कर दी। कृषि विकास व किसान कल्याण विभाग के उप संचालक आरबीएस जाटव ने कहा कि जिन खेतों में पानी का भराव अधिक हो, वहां निकासी की व्यवस्था करें। साथ ही, यूरिया का अभी अतिरिक्त छिड़काव न करें, क्योंकि मिट्टी में पर्याप्त नमी आ चुकी है। किसी प्रकार के कीटनाशक का छिड़काव न करें और मौसम साफ होने का इंतजार करें।
इस तरह करें यूरिया की बचत
कृषि विज्ञान केंद्र ग्वालियर के विज्ञानी डा. शैलेंद्र सिंह कुशवाह ने मावठ की वर्षा को रबी फसलों के लिए गोल्डन ड्रॉप्स बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक पानी मिट्टी की गहराई तक जाकर लंबे समय तक पौधों को नमी और पोषण देता है। इसमें नाइट्रोजन की मात्रा अधिक होती है, जो पौधों की ग्रोथ के लिए यूरिया से ज्यादा प्रभावशाली साबित होती है।
चने के लिए पेस्टीसाइड है मावठ
चने की फसल में इस समय इल्ली लगने का खतरा अधिक होता है। मावठ की बूंदें इसमें प्राकृतिक पेस्टीसाइड (कीटनाशक) का काम करती हैं। वर्षा की बूंदों और ओस के प्रभाव से इल्लियां पनप नहीं पातीं। मावठ से सुरक्षित हुई फसल का दाना अधिक पुष्ट और चमकीला होता है।
