मध्य प्रदेश में बिजली उत्पादन को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जिस तरह शरीर के लिए प्राण जरूरी होते हैं, उसी तरह राज्य के विकास के लिए बिजली सबसे अहम जरूरत है। इसी सोच के साथ प्रदेश में 4 हजार मेगावाट क्षमता की नई ताप विद्युत परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने यह बात सीएम निवास स्थित समत्व भवन में कही, जहां उनकी मौजूदगी में ऊर्जा विभाग और निजी कंपनियों के बीच बिजली आपूर्ति से जुड़े अहम समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। ये सभी परियोजनाएं अनूपपुर जिले में लगेंगी और इन्हें एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के माध्यम से विकसित किया जाएगा।

परियोजना DBFOO मॉडल पर विकसित

सरकार ने इन परियोजनाओं को DBFOO मॉडल (डिजाइन, निर्माण, वित्त, स्वामित्व और संचालन) पर विकसित करने का फैसला किया है। प्रतिस्पर्धात्मक टेंडर प्रक्रिया के बाद कुल 4000 मेगावाट क्षमता का आवंटन किया गया है। इसमें हिंदुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को 800 मेगावाट, टोरेंट पावर लिमिटेड को 1600 मेगावाट और अदाणी पावर लिमिटेड को 800 मेगावाट बिजली उत्पादन की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा ग्रीनफील्ड विकल्प के तहत अतिरिक्त 800 मेगावाट क्षमता भी शामिल की गई है।

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होगा करीब 60 हजार करोड़ रुपये का निवेश

इन परियोजनाओं पर करीब 60 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा। इससे प्रदेश में बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए मांग की 100 फीसदी आपूर्ति संभव हो सकेगी। सरकार का अनुमान है कि इन परियोजनाओं से करीब 3 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और लगभग 5 हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन ताप विद्युत परियोजनाओं के पूरा होने के बाद वर्ष 2030 तक प्रदेश को पर्याप्त और स्थायी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे उद्योग, कृषि और आम लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

 



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