भारत औषधीय संभावनाओं से समृद्ध क्षेत्र है। भारत सरकार शोध कार्यों को नई दिशा दे रही है और आयुर्वेद और होम्योपैथी को भी लगातार आगे बढ़ा रही है। सरकार द्वारा खोले जा रहे अस्पतालों में एलोपैथी की सुविधाओं के साथ ही अब आयुर्वेद और होम्योपैथ के विशेषज्ञ भी नियुक्त किए जाने लगे हैं। भविष्य में मरीजों को एक ही जगह पर सभी विधाओं का इलाज मिलेगा। यह बातें डॉ. एके द्विवेदी ने पत्रकारों से चर्चा में कही। डॉ. एके द्विवेदी को भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने उन्हें शिलांग, मेघालय स्थित पूर्वोत्तर आयुर्वेद एवं होम्योपैथी संस्थान (एनईआईएएच) की वैज्ञानिक सलाहकार समिति में सदस्य (होम्योपैथी विशेषज्ञ) के रूप में नामित किया है।

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शोध से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाएंगे


संस्थान की ओर से 23 जनवरी 2026 को जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, आयुष मंत्रालय के निर्देशों के तहत डॉ. द्विवेदी को आगामी तीन वर्षों के लिए समिति का सदस्य मनोनीत किया गया है। एनईआईएएच भारत सरकार के अधीन पूर्वोत्तर भारत का एकमात्र स्वायत्त आयुष संस्थान है, जहां एक ही परिसर में आयुर्वेद और होम्योपैथी की शिक्षा, शोध और चिकित्सा सेवाएं संचालित की जाती हैं। इस अवसर पर डॉ. एके द्विवेदी ने कहा कि पूर्वोत्तर आयुर्वेद एवं होम्योपैथी संस्थान की वैज्ञानिक सलाहकार समिति में शामिल होना उनके लिए सम्मान और जिम्मेदारी दोनों है। उन्होंने कहा कि वे अपने अनुभवों के माध्यम से शोध कार्यों को नई दिशा देने तथा आयुर्वेद और होम्योपैथी के समन्वय से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने इस अवसर के लिए प्रधानमंत्री और आयुष मंत्रालय के प्रति आभार व्यक्त किया।

संस्थान और समाज में खुशी की लहर


डॉ. द्विवेदी के मनोनयन पर गुजराती समाज के पदाधिकारियों, एसकेआरपी गुजराती होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, शिक्षकों एवं सहकर्मियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी। विशेषज्ञों का मानना है कि उनका अनुभव संस्थान के शैक्षणिक विकास, नीतिगत मार्गदर्शन और शोध गतिविधियों को मजबूती देगा।

पूर्व में भी निभा चुके हैं अहम भूमिका


गौरतलब है कि डॉ. एके द्विवेदी वर्ष 2015 से केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच), आयुष मंत्रालय के वैज्ञानिक सलाहकार बोर्ड के सदस्य के रूप में भी सेवाएं दे रहे हैं। अप्लास्टिक एनीमिया और हीमैटोहाइड्रोसिस जैसी दुर्लभ बीमारियों के उपचार में उनकी विशेषज्ञता के कारण देशभर से मरीज इंदौर पहुंचते हैं।

एनीमिया जागरूकता अभियान से मिली पहचान


डॉ. द्विवेदी द्वारा पिछले 27 वर्षों से संचालित एनीमिया जागरूकता अभियान को केंद्रीय स्तर पर सराहना मिली है। उन्होंने बताया कि इसी निरंतर जनसेवा और जागरूकता कार्यों के चलते भारत सरकार और आयुष मंत्रालय द्वारा उन्हें समय-समय पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाती रही हैं।

इंदौर में फिर चलेगा जागरूकता अभियान


डॉ. द्विवेदी ने जानकारी दी कि इस वर्ष भी इंदौर में एनीमिया जागरूकता अभियान 22 फरवरी से 1 मार्च तक आयोजित किया जाएगा। इस अभियान में सांसद सेवा प्रकल्प मुख्य सहयोगी रहेगा। यह अभियान आयुष मेडिकल वेलफेयर फाउंडेशन, एडवांस्ड होम्योपैथी सोसायटी तथा सेहत एवं सूरत के सहयोग से संचालित होगा, जिसमें प्रशिक्षित टीम द्वारा घर-घर जाकर एनीमिया के लक्षण, रोकथाम और पोषण संबंधी जानकारी दी जाएगी।



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