इंदौर-खंडवा रेल परियोजना से जुड़ी सबसे बड़ी बाधा भले ही दूर हो गई है, लेकिन इस रूट पर अभी भी काम करने में अफसरों की रुचि नहीं है, जबकि सिंहस्थ के समय यह रेलवे लाइन उज्जैन से ओंकारेश्वर को जोड़ने के लिए मददगार रहेगी। वन विभाग ने इस महत्वपूर्ण रेल लाइन के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया है, जिससे अब इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा। इस रूट पर 11 सुरंगों से ट्रेन गुजरेगी। फिलहाल एक टनल का टेंडर हुआ है।

 

यह रेल लाइन उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने वाला सबसे छोटा और सीधा रेल मार्ग साबित होगी, जो न केवल इंदौर के व्यापारिक और औद्योगिक भविष्य को नई रफ्तार देगी, बल्कि यात्रियों को भी समय और दूरी दोनों में राहत देगी।

 

रेलवे अधिकारियों और वन विभाग के बीच संयुक्त बैठक हुई, जिससे इस प्रोजेक्ट की बाधाएं दूर हुईं। देरी होने पर मुख्यमंत्री मोहन यादव तक भी मामला पहुंचा था। अब इस प्रोजेक्ट के लिए वन विभाग से अनुमति मिल गई है। यह रेल मार्ग उत्तर व दक्षिण भारत को जोड़ने वाला सबसे छोटा रेल मार्ग होगा। रेलवे सलाहकार समिति के पूर्व सदस्य नागेश नामजोशी ने बताया कि इस लाइन में 11 सुरंगें बनना हैं। अब उनके निर्माण का काम शुरू होगा। जितने पेड़ काटे जाएंगे, उनकी गिनती हो चुकी है। वर्ष 2030 तक यह रूट तैयार हो सकता है।

 

इंदौर-खंडवा रेल लाइन के पूरा होने के बाद इंदौर का संपर्क सीधे होगा। देश के दूसरे शहरों में जाने वाले यात्रियों को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग जाने में रेल सुविधा मिलेगी। इंदौर से खंडवा रेल मार्ग जुड़ने के बाद भुसावल, नासिक-मुंबई की ओर की कनेक्टिविटी मिल जाएगी। इसके अलावा तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों से इंदौर सीधे जुड़ जाएगा। वहां तक जाने में समय भी कम लगेगा। मालवा व निमाड़ के किसानों व व्यापारियों को अपनी उपज दक्षिण भारत के राज्यों में भेजने में आसानी होगी।



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