नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण दर्जनों मौतें होने और महू में गंदे पानी से लोगों के बीमार होने के मामलों के बाद ग्वालियर नगर निगम ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। ग्वालियर में प्लांटों से सप्लाई होने वाले पानी में कोई समस्या नहीं है, लेकिन बोरिंग से अशुद्ध या अधिक टीडीएस वाला पानी आने की शिकायतें सामने आई हैं।
शहर की 2600 बोरिंगों का सर्वे
इसी को देखते हुए नगर निगम द्वारा शहर की 2600 बोरिंगों का सर्वे कराया जाएगा। इसके आदेश निगमायुक्त ने जारी कर दिए हैं। दो दिन पहले भोपाल में हुई बैठक में मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव ने भी निर्देश दिए थे कि बोरिंग या टैंकरों के माध्यम से आपूर्ति नहीं होनी चाहिए, बल्कि लोगों को घरों में नलों से पानी मिलना चाहिए।
जांच की जाएगी कि बोरिंग का पानी अशुद्ध तो नहीं
सर्वे के दौरान यह जांच की जाएगी कि बोरिंग का पानी अशुद्ध तो नहीं है और उसकी उपयोगिता कितनी है। हाल ही में कांच मिल क्षेत्र में मामला सामने आया था, जहां तिघरा का पानी सप्लाई होने के बावजूद लोग बोरिंग का पानी भी ले रहे थे। इससे नगर निगम पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
नगर निगम ने बिना जरूरत वाली 500 बोरिंग बंद करने का लक्ष्य तय किया है। इससे बिजली की भी बचत होगी। वर्तमान में बिजली कंपनी द्वारा औसत खपत के आधार पर बिल जारी किए जाते हैं। इन बिलों की राशि का समायोजन शासन स्तर पर कर दिया जाता है और चुंगी क्षतिपूर्ति से राशि काट ली जाती है, जिससे नगर निगम को नुकसान उठाना पड़ता है।
नगर निगम का सालाना बिजली खर्च करीब 100 करोड़ रुपये है। हर माह लगभग आठ करोड़ रुपये से अधिक के बिजली बिल निगम को मिलते हैं। इनमें पीएचई के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, बोरिंग, स्ट्रीट लाइटों के अलावा निगम मुख्यालय और कार्यालयों के बिल शामिल हैं। हाल ही में एनर्जी ऑडिट के जरिए एचटी कनेक्शनों के बिल कम कराने की प्रक्रिया की गई है। अब इसी क्रम में बोरिंगों का भी सर्वे कराया जाएगा।
इन चीजों की भी होगी जांच
सर्वे में यह भी देखा जाएगा कि बोरिंग के माध्यम से कितने घरों में पानी की आपूर्ति हो रही है। जिन घरों में बोरिंग का पानी पहुंच रहा है, वहां तिघरा के पानी की आपूर्ति है या नहीं। इसके अलावा यह भी जांच होगी कि बोरिंग कितने घंटे चलती है और उसके अनुसार बिजली का बिल आ रहा है या नहीं। यदि बिलिंग के अनुसार बोरिंग नहीं चल रही है, तो उस पर विशेष निगरानी रखकर वास्तविक बिलिंग कराई जाएगी। उपयोगिता कम होने पर बोरिंग बंद कर दी जाएगी।
अधिकारियों का क्या कहना है
संघ प्रिय, आयुक्त, नगर निगम का कहना है कि शहर में नगर निगम की लगभग 2600 बोरिंग हैं। सभी बोरिंग का सर्वे किया जाएगा कि उनकी कितनी उपयोगिता है। इस संबंध में शासन स्तर से भी निर्देश मिले हैं। यदि किसी क्षेत्र में तिघरा के पानी की आपूर्ति हो रही है और बोरिंग की उपयोगिता नहीं है, तो बोरिंग को बंद कराया जाएगा। इससे बिजली की भी बचत होगी।
