मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मैपकॉस्ट) ने सुरक्षा और साफ सफाई के ठेके के भ्रष्टाचार को दबाने के लिए अब नए सिरे से टेंडर जारी किया है। दरअसल, मैपकॉस्ट ने बिना अर्हता रखने वाले राज्य सहकारी संघ से अनुबंध कर चहेती फर्म को सुरक्षा और साफ सफाई का ठेका दे दिया था। यह मध्य प्रदेश भंडार क्रय एवं सेवा उपार्जन नियम 2015 का स्पष्ट उल्लंघन था।
इस मामले में अमर उजाला ने 22 दिसंबर 2025 को ‘नियमों की अनदेखी, राज्य सहकारी संघ में बंदरबांट, बिना टेंडर चहेती एजेंसियों को दे डाले गार्ड-श्रमिकों के ठेके’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इस खुलासे के बाद मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मैपकॉस्ट) ने सुरक्षा, सफाई के लिए नया टेंडर जारी कर दिया है। इसके लिए 23 फरवरी तक निविदा जमा करने का समय दिया गया है।
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दरअसल, राज्य सहकारी संघ पर गंभीर आरोप हैं कि उसने शासन के भंडार क्रय नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के सुरक्षा गार्ड और श्रमिक सेवाओं के ठेके चहेती एजेंसियों को सौंप दिए। नियमों के मुताबिक राज्य सहकारी संघ केवल अपने विभागीय कार्यालयों में ही सीधे सुरक्षा सेवाएं उपलब्ध करा सकता है, लेकिन इसके बावजूद संघ ने अन्य विभागों, परिषदों और निगमों में भी मैनपॉवर और सिक्योरिटी के अनुबंध कर दिए। अब सवाल यह है कि राज्य सहकारी संघ और मैपकास्ट के सांठगांठ कर किए गए भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या अधिकारी कोई कार्रवाई करेंगे।
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संघ की तरफ से दी भ्रामक जानकारी
सहकारिता विभाग के अंतर्गत आने वाले राज्य सहकारी संघ आरटीआई के जरिए जब अन्य विभागों में मैनपॉवर उपलब्ध कराने से जुड़े शासनादेश मांगे गए, तो संघ की ओर से भ्रामक जानकारी दी गई। जवाब में केवल 9 सितंबर 2021 का आदेश दिया गया, जिसमें राज्य सहकारी संघ को सिर्फ सहकारिता विभाग में ही मानव संसाधन सेवा प्रदाता के रूप में अनुमति दी गई है। इन अनियमितताओं को लेकर मुख्य सचिव अनुराग जैन और सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव डीपी आहूजा से भी शिकायत की गई।
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मैपकॉस्ट में नहीं रुक रही अनियमितता!
बता दें, मैपकॉस्ट में वैज्ञानिक गतिविधियों के बजाय निर्माण और साज-सज्जा पर बजट खपाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि परिषद के कर्ताधर्ता की प्राथमिकता रिसर्च और नवाचार की जगह गेस्ट हाउस और ऑडिटोरियम के रेनोवेशन पर करोड़ों रुपये खर्च करने की है। इसके लिए 23 दिसंबर 2025 को परिषद के रिटायर्ड वैज्ञानिक डॉ. विवेक कटारे की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है, जिसकी अनुशंसा को केवल औपचारिकता बताया जा रहा है। दरअसल इसके पीछे कहानी यह है कि वित्तीय वर्ष के अंतिम समय में करोड़ों रुपये एमपीएलयूएन और पीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर करने की प्लानिंग की जा रही है। बताया जा रहा है कि परिषद में चेहते ठेकेदार सीधे मैपकास्ट के डीजी से मेल मुलाकात कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि शासन ने पिछले दो वर्षों से निर्माण मद में कोई बजट आवंटित नहीं किया है।
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