मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम–2026 के अवसर पर दावोस पहुंचे और “डी-रीस्किंग द ग्रीन लीप” विषय पर आयोजित उच्च स्तरीय राउंड टेबल मीटिंग में शामिल हुए। इस बैठक में उन्होंने मध्यप्रदेश की ऊर्जा नीति और राज्य में हरित ऊर्जा के विकास पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. यादव ने कहा कि नवकरणीय ऊर्जा मध्यप्रदेश के टिकाऊ और समावेशी विकास की आधारशिला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हरित ऊर्जा विज़न से प्रेरित होकर राज्य ने हरित ऊर्जा को विकास की मुख्य धारा में शामिल किया है। इसके चलते बिजली और जल आपूर्ति में स्थिरता आई है, जिससे आम लोगों और उद्योगों दोनों को लाभ मिला है। मुख्यमंत्री ने सौर ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण से जुड़ी नई परियोजनाओं की प्रगति और आगामी योजनाओं की जानकारी भी साझा की।

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बैठक के समापन सत्र में केंद्रीय नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि केंद्र सरकार नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नीति स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने मध्यप्रदेश की सौर ऊर्जा संबंधित उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य का मॉडल वैश्विक स्तर पर साझा किया जा सकता है।

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इस राउंड टेबल में मध्यप्रदेश के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, विभिन्न विभागों के सचिव और अधिकारियों के साथ-साथ वैश्विक और घरेलू निवेशक एवं कंपनियों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। बैठक में राज्य में निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक ड्राफ्ट फ्रेमवर्क पेश किया गया और हरित ऊर्जा में निवेश, नियामकीय आवश्यकताओं और जमीनी वास्तविकताओं के बीच संतुलन बनाने पर चर्चा हुई। इंडोनेशिया के ईस्ट जावा प्रांत के उप-राज्यपाल एमिल एलेस्टियान्तो डार्डक ने मध्यप्रदेश की प्रगतिशील ऊर्जा नीतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि उप-राष्ट्रीय सरकारें राष्ट्रीय नीतियों में बदलाव और नवाचार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।  



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