प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थकों और पुलिस के बीच हुए टकराव के बाद इस घटनाक्रम पर पहली बार उज्जैन से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरिगिरि महाराज का बयान सामने आया है। हरिगिरि महाराज ने इस घटना पर गहरा अफसोस और पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत दुखद समाचार है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज को लेकर सभी साधु-संतों और समाज में चिंतन भी है और गहरी चिंता भी, क्योंकि इस प्रकार की घटनाएं प्रयागराज की गरिमा को कहीं न कहीं ठेस पहुंचाती हैं।

महामंत्री हरिगिरि महाराज ने कहा कि प्रयागराज वह पवित्र स्थान है, जहां स्नान व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट तक सक्षम है और आवश्यक होने पर तत्काल निर्देश भी दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि वीआईपी घाट सहित तमाम व्यवस्थाएं पहले से मौजूद रहती हैं, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था या टकराव की स्थिति न बने। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना में किस पक्ष की गलती थी या नहीं, इस पर जाना उनका उद्देश्य नहीं है। उनका कहना था कि घटना हो चुकी है, लेकिन यह जरूर चिंताजनक है कि कहीं न कहीं किसी स्तर पर चूक हुई है। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए। हरिगिरि ने कहा कि भविष्य में प्रयागराज की मर्यादा और गरिमा बनाए रखने के लिए सभी को जागरूक रहना होगा और आगे बढ़कर प्रयाग के हित में एकजुट होकर खड़ा होना पड़ेगा, ताकि इस प्रकार की दुखद परिस्थितियों की पुनरावृत्ति न हो।

अफसर धर्म और प्रयागराज की मर्यादा को समझते हैं: हरिगिरि

महामंत्री हरिगिरि ने इस मामले में मेला प्रशासन को क्लीन चिट देते हुए कहा कि मेले में तैनात विकास प्राधिकरण अध्यक्ष और अन्य अधिकारी सभी नारायण और त्रिवेणी के उपासक हैं। वे धर्म और प्रयागराज की मर्यादा को समझते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वीआईपी घाट पर स्नान को लेकर हाईकोर्ट की दिशा-निर्देश पहले से मौजूद हैं। ऐसे में विवाद से बचना ही सबसे बेहतर रास्ता था।

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अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पद को लेकर यह कहा

महामंत्री हरिगिरि ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के पद को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि वे जिस पद पर आसीन हुए हैं, उसमें अभी अखाड़ा परिषद की ओर से उन्हें चादर ओढ़ाना बाकी है। हमारी परंपरा है कि समस्त 13 अखाड़े मिलकर एक साथ चादर ओढ़ाते हैं। जब समाज और अखाड़े आपको चादर ओढ़ाएंगे, तभी आप पूरे समाज के शंकराचार्य होंगे और समाज आपको पूरी तरह स्वीकार करेगा।



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