इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौत और बीमार होने का सिलसिला 26 दिन पहले शुरू हुआ था, लेकिन अभी तक नगर निगम के अफसरों को दूषित पानी होने की ठोस वजह नहीं मालूम पड़ी। सुनवाई में कोर्ट ने जोर देकर पूछा तो अफसर बगले झांकने लगे।

अफसरों से दूषित पानी की वजह पूछने पर कोर्ट ने कहा कि पुलिस चौकी का शौचालय नर्मदा लाइन पर बना था। उससे ड्रेनेज के पानी का रिसाव नर्मदा लाइन में हुआ। कोर्ट ने कहा कि क्या यह बात दावे से कहीं जा रही है तो अफसरों ने बस्ती में कुछ और लीकेज होने की बात स्वीकारी, लेकिन दूषित पानी होने की ठोस वजह नहीं बता पाए। कोर्ट ने कहा कि यह भी पता लगाए कि पानी दूषित होने के पीछे कोई केमिकल तो नहीं है।

 

सुनवाई में प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन भी वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए जुड़े थे। कोर्ट को उन्होंने जानकारी दी है कि प्रदेश में हर मंगलवार जलसुनवाई हो रही है। अन्य माध्यमों भी नलों में गंदा पानी अाने की शिकायत की जा सकती है। हमने इस मामले में एक कमेटी भी बना दी है।

 

भागीरथपुर मामले में लगी अलग-अलग जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि उन्हें कमेटी पर भरोसा नहीं है। लोग भी जलसुनवाई पर भरोसा नहीं कर रहे है। अधिवक्ता अजय बागडि़या ने कहा कि दो साल पहले बस्ती में दूषित पानी की शिकायत पर लाइन बदलने के टेंडर जारी हुए थे।

समयसीमा एक साल तय की गई थी, लेकिन 80 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन अफसरों के खिलाफ केस दर्ज होना चाहिए। उन्हें अच्छे पदों पर बैठाया जा रहा है। आपको बता दे कि भागीरथपुरा में दूषित पानी से अब तक 24 मौतें हो चुकी है और डेढ़ हजार से ज्यादा लोग बीमारी हुए है।



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