दरअसल इंदौर की घटना के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप उज्जैन में जनसुनवाई के साथ-साथ जल-सुनवाई का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में सोमवार को शहर के नौ अलग-अलग स्थानों पर पानी की टंकियों पर नगर निगम अधिकारियों ने बैठकर नागरिकों की जल आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं सुनीं और कई शिकायतों का मौके पर ही निराकरण भी किया गया।
इसी दौरान जल कार्य एवं सीवरेज समिति के प्रभारी प्रकाश शर्मा ने मीडिया से बातचीत में गंभीर नदी के पानी की गुणवत्ता को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि गंभीर नदी का पानी इतना शुद्ध है कि उसके सामने बिसलेरी का पानी भी फीका पड़ जाता है। हालांकि इसी बातचीत में उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उज्जैन शहर के कई इलाकों में आज भी 40 से 50 साल पुराने नल कनेक्शन लगे हुए हैं, जिनकी नियमित मरम्मत और देखरेख नहीं की जाती।
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शर्मा के बयान के बाद आम लोगों के बीच सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि उज्जैन का पानी इतना ही शुद्ध है, तो सरकारी कार्यालयों की बैठकों में बिसलेरी की बोतलें क्यों मंगाई जाती हैं और जगह-जगह आरओ सिस्टम क्यों लगाए गए हैं।
जनता पर डाली जिम्मेदारी
दूषित पानी की शिकायतों को लेकर प्रकाश शर्मा ने कहा कि लोग बिजली की केबल खराब होने पर तुरंत उसे ठीक करवा लेते हैं, लेकिन सड़े-गले और टूटे हुए नल कनेक्शनों पर ध्यान नहीं देते, यही लापरवाही जल प्रदूषण का एक बड़ा कारण बनती है।
उन्होंने यह भी बताया कि कई बार पानी की सप्लाई के दौरान या तुरंत बाद मोटर चालू कर दी जाती है, जिससे आसपास का दूषित पानी पाइप लाइन के जरिए अंदर खिंच जाता है। इसी कारण पानी दूषित होता है और लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। फिलहाल इंदौर की घटना के बाद प्रदेशभर में जल गुणवत्ता को लेकर सतर्कता बढ़ गई है और उज्जैन में भी नगर निगम द्वारा जल आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।
