मध्यप्रदेश में सामाजिक न्याय, आरक्षण और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बड़ा सामाजिक-राजनीतिक टकराव सामने आ गया है। रविवार को राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में ओबीसी-एससी-एसटी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर महासम्मेलन और प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह आयोजन अपाक्स (APACS) के बैनर तले हुआ, जिसमें प्रदेशभर से कर्मचारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। महासम्मेलन का मुख्य मुद्दा IAS अधिकारी संतोष वर्मा के समर्थन का रहा। आंदोलनकारियों ने संतोष वर्मा पर की गई कार्रवाई को तुरंत वापस लेने की मांग की। संयुक्त संघर्ष मोर्चा का आरोप है कि संतोष वर्मा पर कार्रवाई दबाव में और एकतरफा तरीके से की गई है। उनका कहना है कि यह दलित, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग की आवाज दबाने का प्रयास है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है।

पूर्व विधायक का विवादित बयान बना विवाद की वजह

महासम्मेलन के दौरान छतरपुर जिले की चंदला विधानसभा से पूर्व विधायक आरडी प्रजापति के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने मंच से कथावाचकों को लेकर बेहद आपत्तिजनक और विवादित टिप्पणी की।प्रजापति ने कहा कि अब बहन-बेटियां तो प्लॉट हो गई हैं। कोई भी सौ बार रजिस्ट्री कराओ, हजार बार रजिस्ट्री कराओ। बहन-बेटियों की छाती से पृथ्वी हिलने लगी है, ये अनिरुद्धाचार्य कहते हैं।एक अंधाचार्य है, वह कहता है कि वाइफ मतलब वंडरफुल इंस्ट्रूमेंट फॉर एंजॉय। तुम भी अपनी एंजॉय वाली मां से पैदा हुए हो का? कितने लोगों ने एंजॉय किया है? तभी तुम्हारी आंखें खराब हो गईं, अंधरा।एक बाबा लाली लगाकर कहता है, 25 साल की लड़कियां कथाओं में जाकर अपनी जवानी ‘उतार कर’ आती हैं। मैं चाहता हूं कि हमको फांसी दी जाए, संतोष वर्मा जी को आईएएस से हटा दिया जाए, लेकिन पहले उनको (कथावाचकों को) जूतों की माला पहनाकर नंगा घुमाया जाए, जो व्यास पीठ से ऐसा बोलते हैं।

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संतोष वर्मा प्रकरण से बदले सामाजिक समीकरण

गौरतलब है कि IAS संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण समाज की एक बच्ची को लेकर दिए गए बयान के बाद सवर्ण समाज के संगठनों ने कड़ा विरोध किया था। इसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई की गई। अब इस पूरे मामले में तस्वीर बदलती नजर आ रही है। सवर्ण संगठनों के विरोध के उलट अब एससी-एसटी-ओबीसी संगठनों ने संतोष वर्मा के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है।

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आरक्षण और अधिकारों को लेकर सरकार पर आरोप

महासम्मेलन को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि प्रदेश में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक नियुक्तियों में लगातार उपेक्षा झेलनी पड़ रही है। हजारों पद वर्षों से खाली हैं, पदोन्नति में आरक्षण लागू नहीं हो पा रहा है और संवैधानिक अधिकार केवल कागजों तक सीमित हैं। नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन आरक्षण से आगे बढ़कर सामाजिक न्याय और प्रशासनिक निष्पक्षता की लड़ाई है। 

संयुक्त संघर्ष मोर्चा की प्रमुख मांगें 

– ओबीसी वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण

– सभी रिक्त और बैकलॉग पदों पर शीघ्र भर्ती

– पदोन्नति में ओबीसी वर्ग को आरक्षण

– निजी और संविदा क्षेत्र में आरक्षण लागू करना

– पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली

– संवैधानिक संस्थाओं में जनसंख्या अनुपात में प्रतिनिधित्व

– IAS संतोष वर्मा पर की गई कार्रवाई को तत्काल वापस लेना



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