नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर: कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम की लीज को लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया व विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के नजदीकी सांसद भारत सिंह कुशवाह के बीच राजनीतिक टकराहट खुलकर सामने आ गई है। इस टकराहट की गूंज दिल्ली और भोपाल में भी सुनाई देगी।

यह आतंरिक द्वंद्व धीरे-धीरे विस्फोटक रूप लेता जा रहा है। जीडीसीए को रूप सिंह स्टेडियम की लीज अवधि बढ़ाने के फैसले पर मेयर इन काउंसिल पहले ही मुहर लगा चुकी थी। शुक्रवार को परिषद की बैठक में स्टेडियम की लीज का प्रस्ताव आने से ठीक पहले सांसद का एक पत्र महापौर डॉ. शोभा सिकरवार व सभापति मनोज तोमर तक पहुंचने के साथ इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ।

पूरा ब्योरा भोपाल संगठन स्तर से भेजा गया

इससे विपक्ष में बैठे भाजपा पार्षद भी दुविधा में फंस गये कि विरोध करें या फिर समर्थन दें। स्टेडियम लीज को लेकर सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ मतभेद और मनभेद अब खुलकर सामने आ गये हैं। इस विवाद का पूरा ब्योरा भोपाल संगठन स्तर से भेज दिया गया है।

48 वर्ष के रूप सिंह स्टेडियम में आगे भी क्रिकेट ही खेला जाएगा। इसी स्टेडियम में एक दिवसीय क्रिकेट के इतिहास में पहला दोहरा शतक लगाने वाले सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट प्रेमियों ने भगवान का दर्जा दिया था।

एमआइसी के प्रस्ताव का भाजपा पार्षदों ने किया समर्थन

सांसद भारत सिंह कुशवाह चाहते थे कि सिंधिया परिवार के वर्चस्व वाले ग्वालियर डिवीजन क्रिकेट एसोसियेशन से इस स्टेडियम को नगर निगम वापस लेकर मध्य वर्गीय परिवारों के प्रतिभावान खिलाड़ियों के लिए विकसित करे। स्टेडियम को लेकर भाजपा में राजनीति अवश्य शुरू हो गई है।

परिषद की बैठक में उल्टी गंगा भी बही। एमआइसी के प्रस्ताव के समर्थन में भाजपा के चार पार्षदों को छोड़कर सभी समर्थन में खड़े नजर आए। सांसद ने संगठन स्तर पर इसी मुद्दे को उठाया है।

गुप्त समझौता

परिषद के गलियारे में चर्चा है कि कांग्रेस और महल के बीच गुप्त समझौता हुआ है। इस प्रस्ताव के पास होने पर महल समर्थित भाजपा पार्षद महापौर के कार्यों में कोई अड़ंगा नहीं डालेंगे। हाल ही में भाजपा पार्षद ब्रजेश श्रीवास परिषद की बैठक में पहुंचे थे।

प्रदेश नेतृत्व को अवगत कराया

जिला अध्यक्ष जय प्रकाश राजौरिया ने परिषद में हुए पूरे घटनाक्रम से प्रदेश नेतृत्व को अवगत करा दिया है। उन्होंने यह भी बता दिया कि पार्षद दल ने इस मुद्दे पर संगठन से कोई दिशा-निर्देश नहीं लिए हैं।

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि सांसद अगर चाहते थे कि लीज रिन्यू नहीं हो तो उन्हें संगठन स्तर पर पहले भाजपा पार्षदों की बैठक लेनी थी और जिलाध्यक्ष के माध्यम से पार्षद दल के लिए कोई दिशा-निर्देश जारी कराने चाहिए थे। हालांकि पार्षद दल में सिंधिया समर्थित पार्षदों की संख्या अधिक है।

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संसदीय क्षेत्र में दखल को लेकर चल रहा द्वंद्व

अंचल की भाजपा में वर्चस्व का मूल झगड़ा तो विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच है। विधानसभा
अध्यक्ष के नजदीकी सांसद और केंद्रीय मंत्री के बीच राजनीतिक मनमुटाव संसदीय क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा बैठकों को लेकर शुरू हुआ। अंचल में भाजपा नेताओं के बीच चल रहे द्वंद्व से शीर्ष नेतृत्व भी पूरी तरह से परिचित है।



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