भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) परिसर में मिले अधजले जुड़वां नवजातों के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि दोनों शिशु मृत पैदा हुए थे और उनके शरीर पर किसी तरह की चोट, संघर्ष, दबाव या बाहरी हिंसा के निशान नहीं पाए गए हैं।पोस्टमार्टम में यह भी दर्ज है कि दोनों नवजात लगभग 8 महीने के प्रीमैच्योर थे। नाल नहीं कटी थी और शरीर साफ नहीं था, जिससे संकेत मिला कि डिलीवरी अस्पताल में नहीं बल्कि घर पर या अस्पताल से बाहर हुई थी।

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10 घंटे देर से किया गया पुलिस को फोन

शव GMC मॉर्चुरी के पीछे रखे एक नीले प्लास्टिक ड्रम में मिले थे। कचरे में लगी आग बुझाने के बाद सफाई कर्मचारियों ने ड्रम में जली हुई सामग्री निकालते समय शव देखे थे। इसके बाद मॉर्चुरी कर्मचारियों ने घटना की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी। पुलिस को फोन लगभग 10 घंटे देर से किया गया। मॉर्चुरी सहायक ने बयान में कहा है कि उच्च अधिकारियों से अनुमति मिलने के बाद ही थाना की सूचना की गई। देरी के कारण पुलिस को कई महत्वपूर्ण शुरुआती सुराग मौके से नहीं मिल सके। घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों का फुटेज जब्त कर लिया गया है, लेकिन कई कैमरों की गुणवत्ता पुरानी होने के कारण फुटेज स्पष्ट नहीं है। पुलिस डीवीआर की तकनीकी जांच कर रही है ताकि रात के समय किसी व्यक्ति की आवाजाही का पता चल सके।

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परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

फिलहाल पुलिस की जांच दो दिशाओं में चल रही है। अस्पताल के गायनिक विभाग में बीते 48–72 घंटों में हुई डिलीवरी और मिसकारेज की एंट्री की जांच और अस्पताल परिसर और आसपास की बस्तियों में हाल में हुए प्रसव या स्वास्थ्य संबंधी मामलों की जानकारी। प्रशासन ने भी GMC परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, जहां 200 से अधिक सुरक्षा कर्मी तैनात होने के बावजूद नवजातों के शव परिसर तक कैसे पहुंचे, इसकी जांच जारी है। पुलिस PM रिपोर्ट के आधार पर अब घटना को अवैध निपटान और शव को गलत तरीके से फेंकने के एंगल से देख रही है। आरोपी की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है।



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