मणिकर्णिका घाट से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। मंगलवार की दोपहर पाल समाज समिति के महेंद्र पाल कार्यकर्ता के साथ मणिकर्णिका पहुंचे और स्थानीय नागरिकों के साथ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर मणिकर्णिका घाट के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है। धरोहर को खत्म किया जा रहा है।

वहीं, प्रशासन ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है। जिला प्रशासन का दावा किया कि मणिकर्णिका घाट पर किसी भी मंदिर को नहीं तोड़ा गया है। यहां अत्याधुनिक शवदाह गृह का निर्माण एक अलग एजेंसी करा रही है। 


अधिकारियों के अनुसार पुनर्विकास योजना के तहत घाट पर दो सामुदायिक शौचालय, हरित क्षेत्र, 32 शवदाह प्लेटफॉर्म, प्रदूषण रहित चिमनी, पंजीकरण कक्ष, लकड़ी भंडारण स्थल और प्रतीक्षा कक्ष बनाए जा रहे हैं। पूरे प्रोजेक्ट में भूतल और प्रथम तल को मिलाकर बड़े पैमाने पर आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। 

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मौके पर एडीएम सिटी आलोक वर्मा, एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी, अपर नगर आयुक्त संगम लाल और थाने के फॉर्स पहुंच कर सभी को समझाया और धरना समाप्त कराया। अधिकारियों ने कहा कि यहां से निकलीं मूर्तियां नमो घाट पर रखी गई हैं। 

बता दें कि वायरल वीडियो में बुलडोजर चलता हुआ दिखाई दे रहा है। आठ सेकंड का यह वीडियो अकांक्षा सिंह रघुवंशी के सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट किया गया, जिसमें आवाज सुनाई दे रही है कि “विकास के नाम पर विनाश, देखिए कैसे मंदिर गिराए जा रहे हैं। वीडियो के वायरल होते ही राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।

 



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