भोपाल जिले में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट की बड़ी सच्चाई सामने आई है। शहर के कुल मतदाताओं में से 10.5 प्रतिशत यानी 2 लाख 23 हजार 905 वोटर्स ‘नो मेपिंग’ की श्रेणी में पाए गए हैं। ये ऐसे मतदाता हैं, जिनका नाम तो वोटर लिस्ट में है, लेकिन 2003 की मूल मतदाता सूची से उनका कोई रिकॉर्ड मेल नहीं खा रहा। अब प्रशासन के सामने चुनौती है कि 50 दिनों के भीतर इन वोटर्स का रिकॉर्ड ढूंढा जाए, अन्यथा नियमानुसार इनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं।

नरेला विधानसभा सबसे आगे

नो मेपिंग’ के मामलों में नरेला विधानसभा सबसे आगे है। यहां 54,667 वोटर्स (15.41%) इस श्रेणी में रखे गए हैं। इसके बाद गोविंदपुरा – 46,178,हुजूर – 33,513,भोपाल दक्षिण-पश्चिम- 32,376,भोपाल मध्य- 27,308,भोपाल उत्तर-26,702,वहीं, बैरसिया विधानसभा में सबसे कम सिर्फ 3,162 वोटर्स (1.25%) नो मेपिंग में हैं।

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50 दिन की सुनवाई, 100 अधिकारी तैनात

उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता के मुताबिक, नो मेपिंग वोटर्स की 50 दिन तक सुनवाई होगी। इसके लिए प्रत्येक विधानसभा में अतिरिक्त अधिकारियों की तैनाती की जा रही है। जिले में 100 सहायक रजिस्ट्रेशन अधिकारी मतदाताओं की व्यक्तिगत सुनवाई करेंगे। 16 दिसंबर को प्रारंभिक मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद  बीएलओ फिर से फॉर्म लेंगे। नए मतदाता नाम जुड़वा सकेंगे। नो मेपिंग वोटर्स को अपने दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।यदि तय समय में रिकॉर्ड नहीं मिला, तो नाम काटने की प्रक्रिया शुरू होगी।

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कुल 4.79 लाख वोटर्स पर कार्रवाई की तैयारी

नो मेपिंग के अलावा मृत, शिफ्टेड, गायब और डुप्लीकेट नाम जोड़ें तो कुल 4 लाख 79 हजार 944 वोटर्स ऐसे हैं, जिन्हें हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित है। इस पूरी कवायद ने भोपाल की वोटर लिस्ट की सटीकता और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आने वाले 50 दिन तय करेंगे कि कितने नाम बचेंगे और कितने हमेशा के लिए सूची से बाहर होंगे।



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