इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में फैले संक्रमण पर नियंत्रण पाने के लिए मध्य प्रदेश शासन के आयुष विभाग ने एक विस्तृत योजना तैयार की है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर शासकीय अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय के विशेषज्ञों द्वारा यहां विशेष चिकित्सा शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों के माध्यम से क्षेत्र के प्रभावित लोगों को आयुर्वेदिक औषधियां वितरित की जा रही हैं और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परामर्श दिया जा रहा है। आयुर्वेद चिकित्सकों की टीम स्थानीय संजीवनी क्लिनिक के डॉक्टरों के साथ मिलकर मरीजों के स्वास्थ्य का रिकॉर्ड भी रख रही है। शासकीय अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अजीत पाल सिंह चौहान एवं जिला आयुष अधिकारी डॉ. हंसा बारिया ने बताया कि मरीजों को चिकित्सा सहायता एवं दवाइयां प्रदान की जा रही हैं ताकि मरीज जल्दी स्वस्थ हो सकें।

इम्युनिटी बढ़ाने पर विशेष जोर

प्रशासन का मानना है कि जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी मजबूत थी, वे गंदे पानी के संक्रमण से सुरक्षित रहे। इसी को ध्यान में रखते हुए अब आयुष विभाग घर-घर जाकर लोगों की इम्युनिटी बढ़ाने पर काम कर रहा है। विभाग की टीमें लोगों को साफ-सफाई रखने, पानी उबालकर पीने और प्राकृतिक तरीके से शरीर को मजबूत बनाने की सलाह दे रही हैं। आयुष विभाग का यह मानना है कि दवाओं के साथ-साथ सही खान-पान और आयुर्वेदिक उपाय बीमारी से लड़ने में सबसे ज्यादा सहायक होते हैं।

कोविड मॉडल पर आधारित पहल

संक्रमण काल के दौरान जिस तरह घर-घर काढ़ा और हर्बल उपायों का वितरण किया गया था, उसी सफल मॉडल को भागीरथपुरा में भी लागू किया गया है। लोगों को पानी में सौंफ, जीरा, धनिया और पुदीना जैसी घरेलू औषधियां उबालकर पीने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह पहल न केवल बीमार मरीजों को जल्द स्वस्थ करने के लिए है, बल्कि उन लोगों को भी सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए है जो अब तक संक्रमण की चपेट में नहीं आए हैं।

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किचन को बनाया डिस्पेंसरी

क्षेत्र में तैनात आयुष विशेषज्ञों के अनुसार हमारे किचन में मौजूद मसाले ही सबसे बड़ी दवा हैं। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि सौंफ, जीरा, सोंठ, धनिया और पुदीना का सही मिश्रण पाचन तंत्र को मजबूत करता है और उल्टी-दस्त जैसी समस्याओं में राहत देता है। इसके साथ ही लोगों को कच्चे भोजन के सेवन से बचने और हल्का व सुपाच्य भोजन लेने की हिदायत दी गई है। जिला आयुष अधिकारी और अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य के मार्गदर्शन में चल रही इस मुहिम को स्थानीय जनता का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है।



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