नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। भीमराव आंबेडकर का कथित रूप से पोस्टर जलाने के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने ग्वालियर हाई कोर्ट अभिभाषक संघ के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता अनिल मिश्रा को राहत देते हुए एक लाख के मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।

हाई कोर्ट ने माना कि पुलिस ने अधिवक्ता मिश्रा को अवैध तरीके से गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस उन्हें नोटिस देकर भी छोड़ सकती थी।

ग्वालियर में लंबे समय से हाई कोर्ट परिसर में आंबेडकर प्रतिमा लगाए जाने के मुद्दे पर वकीलों और दलित संगठनों के बीच टकराव चल रहा है।

दोनों ओर से आंदोलन प्रदर्शन हुए। शिवपुरी के खनियांधाना में भी दलित संगठन के कार्यक्रम में मनुस्मृति जलाने का वीडियो सामने आया।

उसके बाद जवाब में एक जनवरी को सोशल मीडिया पर दूसरा वीडियो आया, जिसमें कुछ लोग कथित रूप से भीमराव आंबेडकर का पोस्टर जलाते नजर आए।

बढ़ते विवाद को देखते हुए पुलिस ने एक जनवरी की शाम 7:56 बजे एडवोकेट अनिल मिश्रा, मोहित शर्मा, अमित दुबे, ध्यानेंद्र शर्मा, कुलदीप कांकेरिया, गौरव व्यास, अनिल भदौरिया सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

दावा किया गया कि एडवोकेट अनिल मिश्रा सहित तीन वकीलों को पुलिस ने एफआईआर से पहले ही हिरासत में ले लिया था। अधिवक्ताओं ने याचिका लगाकर गिरफ्तारी को अवैध बताया है।

तीन दिन तक बहस के बाद हाई कोर्ट ने बुधवार को मिश्रा का राहत दे दी। आदेश में मामले से जुड़े जुलूस निकालने और अन्य संबंधित गतिविधियों पर रोक लगाई है। मिश्रा के वकील राजीव शर्मा ने बताया कि एफआईआर निरस्‍त करने की मांग को लेकर अलग कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

दलित संगठनों ने की थी एनएसए लगाने की मांग

बता दें कि आंबेडकर की तस्वीर जलाने और आपत्तिजनक नारेबाजी के मामले को लेकर ग्वालियर में दो जनवरी को भीम आर्मी, आजाद समाज पार्टी सहित विभिन्न दलित संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर करीब ढाई घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया था। एफआईआर को नाकाफी बताते हुए एडवोकेट अनिल मिश्रा पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाने की मांग की गई थी।



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