राजधानी भोपाल में सड़कों से उड़ती धूल ने वायु प्रदूषण को चिंताजनक स्तर तक पहुंचा दिया है। बिगड़ते एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) को देखते हुए नगर निगम ने धूल नियंत्रण और प्रदूषण घटाने के लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार की है। यह प्रस्ताव मंजूरी के लिए नगर निगम कमिश्नर को भेजा गया है, जिसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। शहर में बड़ी संख्या में सड़क किनारे अब भी कच्चे हिस्से हैं। वाहनों की लगातार आवाजाही के कारण यहां जमी मिट्टी सड़क पर फैल जाती है और हवा में घुलकर प्रदूषण बढ़ाती है। इसके अलावा लगभग 1500 किलोमीटर सड़कों की हालत खराब है, जिससे दिनभर धूल के गुबार उड़ते रहते हैं।

डस्ट कंट्रोल के लिए बदलेगा शहर का स्वरूप

नगर निगम की योजना के तहत सड़क किनारे के सभी कच्चे हिस्सों को पक्का किया जाएगा। इन स्थानों पर पैविंग ब्लॉक लगाए जाएंगे ताकि मिट्टी और धूल दोबारा सड़क पर न पहुंचे। इसके साथ ही शहरभर में सड़क निर्माण से जुड़े गड्ढों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा। प्रदूषण कम करने के लिए सेंट्रल वर्ज और साइड वर्ज पर हरियाली विकसित करने का भी प्रस्ताव है। सूखी और बंजर पट्टियों में गार्डनिंग की जाएगी, जिससे धूल उड़ने पर रोक लगेगी। रात के समय सड़कों, वृक्षों और डिवाइडरों पर पानी का नियमित छिड़काव भी योजना में शामिल है।

फाउंटेन और स्प्रे सिस्टम से हवा में नमी बढ़ाने की तैयारी

नगर निगम की योजना शहर के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर लगे सभी फाउंटेन को पूरी क्षमता से चालू रखने की है। इनसे वातावरण में नमी बनी रहेगी और हवा में धूल के कण नीचे बैठेंगे। इसके साथ ही ज्यादा प्रदूषित इलाकों में विशेष वॉटर स्प्रे सिस्टम चलाने पर भी विचार किया गया है।

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सीएस की बैठक के बाद बनी ठोस कार्ययोजना

अब तक नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत मिले फंड का प्रभावी उपयोग नहीं हो पाया था। हाल ही में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने संबंधित विभागों की बैठक लेकर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि समयबद्ध और दीर्घकालीन योजना बनाई जाए। इसके बाद नगर निगम ने प्रदूषण नियंत्रण को लेकर यह एक्शन प्लान तैयार किया है। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार सभी विभागों से जुड़े कार्यों को समन्वय के साथ लागू किया जाएगा। बजट स्वीकृति मिलते ही टेंडर जारी कर जमीनी स्तर पर काम शुरू किया जाएगा।

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करोड़ों रुपये खर्च, लेकिन हवा जस की तस

पिछले छह वर्षों में केंद्र सरकार से मिले 242 करोड़ रुपये में से अधिकांश राशि खर्च हो चुकी है, इसके बावजूद भोपाल के पीएम-10 स्तर में नाममात्र की ही कमी आई है। इसी अनुभव के चलते निगम इस बार निगरानी, टाइमलाइन और जिम्मेदारी तय करते हुए योजना लागू करने की बात कर रहा है। बढ़ते प्रदूषण के बीच नगर निगम की यह नई रणनीति भोपाल की हवा को कितनी राहत दे पाती है, यह आने वाले महीनों में साफ होगा।

 



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