पूर्व भाजपा विधायक और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र आकाश विजयवर्गीय ने कहा है कि भागीरथपुरा में हुई मौतों के मामले में पानी गंदा नहीं था। उन्होंने कहा है कि पानी गंदा होता तो लोग पीते ही नहीं। पत्रकारों से बातचीत के दौरान आकाश ने कहा कि स्थिति में अब सुधार है। लोग अस्पतालों से डिस्चार्ज होकर घर आ रहे हैं। आशा कार्यकर्ता और डाक्टर लगातार क्षेत्र में सर्वे कर रहे हैं। 8 से 9 अस्पतालों में मरीजों का इलाज चल रहा है। मरीजों में संक्रमण के लक्षण मिलते ही प्रारंभिक इलाज किया जाता है और जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती भी करवाया जा रहा है। गौरतलब है कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र में गंदे पानी के संक्रमण के कारण 15 लोगों की जान चली गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया था संक्रमण
स्वास्थ्य विभाग ने जल संक्रमण की बात की पुष्टि करते हुआ बताया था कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में जल संक्रमण मिला है और उसकी वजह से लोगों को स्वास्थ्य परेशानियों का सामना करना पड़ा है। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा था कि वर्तमान में टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। जलापूर्ति पुनः प्रारंभ होने पर कहीं भी लीकेज या संदूषण की आशंका पाए जाने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से में जलापूर्ति शुद्ध पाई गई है, जबकि शेष हिस्सों में पुरानी एवं क्षतिग्रस्त लाइनों के कारण समस्या सामने आई है, जिन्हें दुरुस्त किया जा रहा है।
पानी गंदा नहीं आया
मुझे जानकारी दी गई है कि 2003 में भागीरथपुरा का थाना बना था वहीं ड्रेनेज लाइन तो 1997 में डली थी। पूरे इंदौर में ड्रेनेज चोक होता है और गंदा पानी आता है, यहां पर पानी गंदा नहीं आया था, पानी गंदा होता तो लोग पीते ही नहीं।
अधिकारियों को हटाने की पावर मेरे पास नहीं
60 प्रतिशत वार्ड में ड्रेनेज, सड़क और नर्मदा का काम करवा दिया गया है। जब भी शिकायत आती है तो हम उसका निराकरण करते हैं। हमारा फोकस इसी पर है कि लोग पहले स्वस्थ हो जाएं। मैं इस पावर में नहीं हूं जो अधिकारियों को हटा दूं। जो भी अधिकारी आता है हम उसके साथ काम करते हैं।
जो हो गया सो हो गया
आकाश ने कहा जो हो गया सो हो गया, अब हम प्रयास कर रहे हैं कि आगे इस तरह की कोई घटना न हो। जो भी कमियां थी वह दूर कर दी गई हैं। बार बार पानी की टेस्टिंग की जा रही है।
अधिकारी टाल रहे थे काम
नगर निगम अधिकारी वार्ड की लाइनों के प्रोजेक्ट्स को लेकर बार बार टाल रहे थे। उनका कहना था कि यह प्रोजेक्ट हमने अमृत योजना में लिया है। इसलिए यह रुका रहा। पार्षद कमल वाघेला भी यहां के काम पूरे करवाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे।
