इंदौर जिले के ग्राम चित्तौड़ा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सम्मिलित हुए। इस दौरान उन्होंने आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक समरसता पर विशेष जोर दिया। मुख्यमंत्री ने जमीन पर बैठकर कथा श्रवण किया और गुरुवर कमल किशोर नागर महाराज का आशीर्वाद लिया।

आध्यात्मिक चेतना और नैतिकता का संगम

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भागवत कथा और सत्संग समाज में सदाचार और नैतिकता की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने बताया कि आध्यात्मिक अनुभूति सामाजिक चेतना का एक सशक्त माध्यम है। कथा सुनने से मन को जो तृप्ति मिलती है, वह भौतिक सुख-साधनों और वैभव से प्राप्त नहीं की जा सकती। उनके अनुसार, सत्संग ही जीवन को सही दिशा देने का मार्ग है।

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गौ-सेवा और प्रदेश का संकल्प

कमल किशोर नागर महाराज द्वारा किए जा रहे गौ-सेवा कार्यों की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गौ माता की सेवा करना जीवन का सबसे बड़ा पुण्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश सरकार गौशालाओं के विकास के लिए लगातार कदम उठा रही है। सरकार का लक्ष्य मध्य प्रदेश को गौ-सेवा के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने “जहां गाय, वहां गोपाल” के सिद्धांत को सर्वोपरि बताया।

जल संरक्षण और सिंहस्थ की तैयारी

सनातन संस्कृति और सिंहस्थ कुंभ के महत्व पर चर्चा करते हुए डॉ. यादव ने जल संरक्षण को जीवन का आधार बताया। उन्होंने क्षिप्रा नदी के शुद्धिकरण और घाटों के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी सिंहस्थ को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए जल संरक्षण के प्रयास युद्ध स्तर पर जारी हैं।

धर्म और विकास का समन्वय

इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के नेतृत्व में धर्म, संस्कृति और विकास के कार्यों को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं, कमल किशोर नागर महाराज ने मुख्यमंत्री की सादगी की सराहना करते हुए कहा कि जब नीति और धर्म एक साथ चलते हैं, तो प्रदेश की समृद्धि सुनिश्चित होती है।



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