दूषित पानी से भागीरथपुरा में होने वाली मौतों का सिलसिला नहीं रुक रहा है। गुरुवार को बस्ती के दो परिवारों ने दावा किया कि उनके परिजनों की मौत भी उल्टी-दस्त के कारण हुई। मृतक का नाम अरविंद पिता हीरालाल कुलकर्णी है।

इसके अलावा शंकर भाया की मौत भी हो चुकी है, हालांकि प्रशासन डायरिया से चार मौतें ही मान रहा है। 25 दिसंबर से 31 दिसंबर तक 12 मौतें हो चुकी है। उधर क्षेत्रीय विधायक व नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मृतक के परिजनों से मिलने पहुंचे और उन्हें सरकारी राहत के चेक बांटे। वे पार्षद कमल वाघेला के साथ स्कूटर पर सवार होकर निकले। वे यादव परिवार के यहां रुके, लेकिन परिजनों ने चेक लेने से इनकार कर दिया।

 

दो साल से आ रहा है गंदा पानी

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय गली में पहुंचे तो महिलाएं उनके आसपास आई और कहा कि दो साल से गंदा पानी आ रहा है। हमने कई बार शिकायतें की। पहले हमारी सुन ली जाती तो इतने लोग नहीं मरते। एक बुर्जुग व्यक्ति भी जोर-जोर से चिल्लाने लगा। विजयवर्गीय उसके पास पहुंचे और हाथ पकड़ कर इत्मीनान से बात सुनी और कहा कि मैं सारी बस्ती की ड्रेनेज लाइन बदलवा दूंगा। इसके बाद विजयवर्गीय अन्य परिवारों से भी मिले।

 

50 से ज्यादा लोग भर्ती

भागीरथपुरा बस्ती के पचास से ज्यादा लोग अभी भी अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती है। डाॅक्टरों का कहना है कि जिनकी रोग प्रतिरोध क्षमता कम है। उन्हें ज्यादा परेशानी आ रही है। ज्यादातर लोगों के पेट का इंफेक्शन दवाई गोलियों से ठीक हो रहा है। गुरुवार को नए मरीज सामने आए।

 

एसीएस ने देखी जलापूर्ति

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नगरीय विकास व आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे को जांच के लिए कहा है। गुरुवार सुबह वे भागीरथपुरा बस्ती पहुंचे। उन्होंने जलापूर्ति के समय पानी की गुणवत्ता को देखा और पानी को सूंघा भी। इसके अलावा वे उस स्थान पर भी गए। जहां नर्मदा लाइन में शौचालय का पानी मिल रहा था। ड्रेनेज लाइनों की स्थिति भी उन्होंने देखी।



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