भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उज्जैन की विशेष न्यायालय ने प्रेमसिंह यादव, तत्कालीन उप निरीक्षक पुलिस थाना घट्टिया, को चार वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

मामला 15 मार्च 2023 का है, जब आशाराम यादव ने पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त को शिकायत की थी। आशाराम के जीजा की मोटरसाइकिल दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी और उन्हें संबल योजना के तहत सहायता राशि के लिए पीएम रिपोर्ट की कॉपी चाहिए थी। उसी दौरान उप निरीक्षक प्रेमसिंह यादव ने इसके लिए 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।

शिकायत मिलने पर लोकायुक्त के उप पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार तालान ने आशाराम को डिजिटल वाइस रिकॉर्डर दिया और बातचीत रिकॉर्ड करने के लिए कहा। आशाराम ने रिश्वत की बातचीत रिकॉर्ड कर उप पुलिस अधीक्षक को सौंप दी। रिकॉर्डिंग में प्रेमसिंह यादव की आवाज की पुष्टि की गई।

भोपाल में 22 मार्च 2023 को मामला पंजीबद्ध किया गया था


हालांकि, ट्रेप कार्रवाई के दौरान प्रेमसिंह यादव को शक हो गया और उसने रिश्वत लेने से मना कर दिया। इसके बाद थाना विपुस्था, भोपाल में 22 मार्च 2023 को मामला पंजीबद्ध किया गया। विवेचना उपरांत उप पुलिस अधीक्षक राजेश पाठक ने आरोपी के खिलाफ चालानी कार्रवाई की।

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विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), उज्जैन ने प्रेमसिंह यादव को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 के तहत दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदण्ड से दंडित कर भेरूगढ़ जेल भेज दिया।



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