इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से 8 लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के बीमार होने की घटना को लेकर प्रदेश की राजनीति तेज हो गई है। एक ओर मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है, वहीं दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ितों को मुआवजा देने की मांग की है।

पीसीसी चीफ ने बनाई जांच कमेटी 

मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 31 दिसंबर 2025 को जारी पत्र में कहा कि देश के सबसे साफ शहर कहे जाने वाले इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतें सरकार की गंभीर विफलता को उजागर करती हैं। इस घटना की जांच के लिए गठित समिति में पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा, पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह, विधायक भंवर सिंह शेखावत (बदनावर-इंदौर), विधायक महेश परमार (तराना-उज्जैन) और विधायक प्रताप ग्रेवाल (सरदारपुर-धार) को शामिल किया गया है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह इंदौर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात करे और 5 जनवरी 2026 तक अपनी रिपोर्ट पार्टी कार्यालय को सौंपे।

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प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही

इधर, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र और जारी बयान में कहा कि भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की सप्लाई से हजारों लोग बीमार हुए हैं और 8 नागरिकों की जान जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और सरकार की घोर विफलता का नतीजा है।

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नए साल की खुशियों को मातम में बदल दिया

उमंग सिंघार ने तंज कसते हुए कहा कि साल के अंतिम दिन भाजपा सरकार ने नए साल की खुशियों को मातम में बदल दिया। उन्होंने हाल ही में पेश किए गए 2047 के विजन डॉक्यूमेंट पर सवाल उठाते हुए कहा कि गुलाबी भविष्य के दावों के बीच इंदौर जैसी घटना सरकार की हकीकत को उजागर करती है। नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि पूरे मामले की तत्काल उच्चस्तरीय जांच हो, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब जनता की सेहत के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।



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