सतना जिला अस्पताल में बीती देर रात एक ऐसा दुर्लभ मामला सामने आया, जिसने डॉक्टरों के साथ-साथ अस्पताल स्टाफ को भी आश्चर्यचकित कर दिया। यहां सात माह की गर्भवती महिला प्रियंका साकेत ने एक साथ तीन बेटियों को जन्म दिया। विशेष बात यह रही कि तीनों बच्चियों का जन्म सामान्य प्रसव (नॉर्मल डिलीवरी) से हुआ। समय से पहले जन्म और कम वजन होने के कारण तीनों नवजातों को तुरंत विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है।
डेढ़ घंटे में पूरी हुई ट्रिपलेट डिलीवरी
अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार पहली बच्ची का जन्म 24 जून की रात 10:25 बजे हुआ। इसके बाद दूसरी बच्ची रात 11:45 बजे और तीसरी बच्ची रात 11:56 बजे पैदा हुई। इस तरह करीब डेढ़ घंटे के भीतर तीनों बच्चियों की सफल नॉर्मल डिलीवरी कराई गई। प्रत्येक नवजात का वजन लगभग एक किलोग्राम बताया गया है।
समय से पहले जन्म, इसलिए विशेष निगरानी
चिकित्सकों के मुताबिक गर्भावस्था के सातवें माह में प्रसव होने के कारण नवजात पूरी तरह विकसित नहीं थे। ऐसे में तीनों बच्चियों को जन्म के तुरंत बाद एसएनसीयू में भर्ती किया गया, जहां उनकी सांस, शरीर का तापमान, पोषण और अन्य जरूरी स्वास्थ्य मानकों की लगातार निगरानी की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल सभी नवजातों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मां की हालत स्थिर, परिवार में खुशी का माहौल
अस्पताल प्रशासन के अनुसार प्रसूता प्रियंका साकेत की तबीयत सामान्य है और उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। एक साथ तीन बेटियों के जन्म से परिवार में खुशी का माहौल है। वहीं अस्पताल में भी इस सफल प्रसव की चर्चा बनी हुई है।
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आठ महीने में तीसरी ट्रिपलेट डिलीवरी
सतना जिला अस्पताल में पिछले आठ महीनों के दौरान यह ट्रिपलेट डिलीवरी का तीसरा सफल मामला है। इससे पहले 22 नवंबर 2025 को मैहर जिले की एक महिला ने यहां तीन शिशुओं को जन्म दिया था। इसके बाद 27 अप्रैल 2026 को पन्ना जिले की एक प्रसूता की भी सफल ट्रिपलेट नॉर्मल डिलीवरी कराई गई थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने जिला अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की चिकित्सा सेवाओं और विशेषज्ञता को नई पहचान दिलाई है।
ट्रिपलेट गर्भावस्था क्यों मानी जाती है दुर्लभ?
विशेषज्ञों के अनुसार एक साथ तीन शिशुओं का गर्भधारण और सुरक्षित प्रसव सामान्य गर्भावस्था की तुलना में काफी दुर्लभ होता है। ऐसे मामलों में मां और नवजातों दोनों के लिए जोखिम अधिक रहता है। समय से पहले प्रसव और कम वजन जैसी चुनौतियों के बावजूद सफल नॉर्मल डिलीवरी होना चिकित्सकीय दृष्टि से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।
