नौरादेही टाइगर रिजर्व की मोहली रेंज में 22 जून 2026 को एक ग्रामीण पर बाघ के हमले की घटना को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव वन तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। अजय दुबे ने अपने पत्र में दावा किया है कि घटना से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है, जिसमें शुरुआती कुछ सेकंड में संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। उन्होंने आशंका जताई है कि कहीं बाघ पर गोलीबारी या किसी अन्य तरीके से हमला तो नहीं किया गया, जिसके बाद वह उग्र होकर ग्रामीण पर हमला करने पर मजबूर हुआ। हालांकि इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ये भी पढ़ें- MP News: मंत्री राकेश सिंह बोले-कांग्रेस हताशा में अनर्गल आरोप लगा रही,मुख्यमंत्री का विकास एजेंडा नहीं रुकेगा
पत्र में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। दुबे का आरोप है कि विभाग ने घटना को सामान्य मानव-वन्यजीव संघर्ष बताकर मामले को दबाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा यह दावा किया गया कि युवक पर हमला उस समय हुआ जब वह शौच के लिए गया था, लेकिन इस दावे की स्वतंत्र जांच होना चाहिए। वन्यजीव कार्यकर्ता ने यह भी सवाल उठाया है कि घटना के समय क्षेत्र में तैनात गश्ती दल कहां था। उनके अनुसार, संवेदनशील क्षेत्र में वन अमले की अनुपस्थिति सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
ये भी पढ़ें- MP News: शिकायतों का समय पर समाधान करें, मुख्य सचिव अनुराग जैन ने विभागों की समीक्षा में दिए निर्देश
पत्र में पटना मोहली गांव के विस्थापन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया है। अजय दुबे का कहना है कि गांव के विस्थापन के लिए करोड़ों रुपये की राशि स्वीकृत होने के बावजूद अब तक ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर नहीं बसाया गया है। इससे मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि नौरादेही टाइगर रिजर्व में पहले भी एक रेडियो कॉलर लगे बाघ के रहस्यमय ढंग से गायब होने का मामला सामने आ चुका है, जिसकी गुत्थी आज तक नहीं सुलझ सकी है। अपने पत्र में अजय दुबे ने मांग की है कि वीडियो की तकनीकी और बैलिस्टिक जांच कराई जाए, घटना के समय ड्यूटी से अनुपस्थित कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा विस्थापन में हुई देरी और संभावित अनियमितताओं की भी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।