चंबल अंचल में वर्षों से सक्रिय अवैध रेत कारोबार के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए रेत माफियाओं पर सख्त शिकंजा कसा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जिले में अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, जिसका असर अब जमीनी स्तर पर भी दिखाई देने लगा है।

जानकारी के अनुसार अवैध रेत उत्खनन और परिवहन में संलिप्त लोगों के साथ-साथ उन जमीन मालिकों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है, जिनकी भूमि पर अवैध रूप से रेत का भंडारण किया जा रहा था। अब तक करीब 500 लोगों को बाउंड ओवर किया जा चुका है। इसके अलावा जिले के 20 कुख्यात रेत माफियाओं को जिलाबदर किया गया है, जबकि 90 से अधिक लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं।

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चंबल क्षेत्र लंबे समय से अवैध रेत उत्खनन के लिए बदनाम रहा है। यहां रेत माफियाओं का नेटवर्क इतना मजबूत माना जाता था कि प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद अवैध कारोबार लगातार जारी रहता था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और खनिज विभाग की संयुक्त टीमों ने अभियान तेज कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार जिन सड़कों पर पहले दिन-रात रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली दौड़ते नजर आते थे, वहां अब ऐसी गतिविधियों में काफी कमी आई है। कई स्थानों पर संचालित अवैध रेत मंडियां भी लगभग बंद हो चुकी हैं। प्रशासन इसे अपनी कार्रवाई का सकारात्मक परिणाम मान रहा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चंबल नदी और उससे जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। अवैध खनन, परिवहन या भंडारण की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है, वहीं वन विभाग भी नदी क्षेत्र और संरक्षित इलाकों में विशेष गश्त कर रहा है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अवैध रेत कारोबार को दोबारा पनपने नहीं दिया जाएगा। आने वाले दिनों में भी संयुक्त अभियान जारी रहेगा और कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस सख्ती से रेत कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

 



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