मध्यप्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ते ने बिहार के मधुबनी जिले से गिरफ्तार मदरसा शिक्षक इजहार-उल-हक को ट्रांजिट रिमांड पर भोपाल लाकर जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया। अदालत ने उसे 22 जून तक एटीएस की रिमांड पर भेज दिया है। वहीं उत्तरप्रदेश के सहारनपुर (देवबंद) से गिरफ्तार नईम अब्दुल्ला और राजस्थान के अलवर से गिरफ्तार शाकिर मेव की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें मेडिकल परीक्षण के उपरांत न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया।
एटीएस की पूछताछ में इजहार-उल-हक से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार इस कथित मॉड्यूल से जुड़े सभी संदिग्ध एक-दूसरे के लगातार संपर्क में थे और देश के विभिन्न हिस्सों में स्लीपर सेल नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि 56 वर्षीय इजहार-उल-हक कथित तौर पर विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में रहने वाले प्रमुख व्यक्तियों में शामिल था। एजेंसियों के अनुसार वह विभिन्न आरोपियों तक संदेश और निर्देश पहुंचाने का माध्यम बना हुआ था।
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कई राज्यों तक फैला नेटवर्क
एटीएस सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में यह संकेत मिले हैं कि नेटवर्क से जुड़े लोगों को नए सदस्यों को जोड़ने और गतिविधियों का विस्तार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क का दायरा कितने राज्यों तक फैला हुआ है और इससे कितने लोग जुड़े हैं। जांच में भोपाल के एक अन्य आरोपी फराज का नाम भी सामने आया है। एजेंसियां उसकी भूमिका और कथित गतिविधियों की भी जांच कर रही हैं।
डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी
पूरे नेटवर्क की परतें खोलने के लिए एटीएस आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है। मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क से जुड़े संभावित लोगों की पहचान की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियों ने कुछ अन्य संदिग्धों की पहचान भी की है, जो विभिन्न राज्यों में सक्रिय बताए जा रहे हैं। उनकी भूमिका की पुष्टि के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल एटीएस मामले की गहन जांच कर रही है और सभी तथ्यों तथा डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क की वास्तविक संरचना और गतिविधियों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
