बाबा महाकालेश्वर मंदिर की दर्शन व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आम श्रद्धालुओं के लिए वर्षों से गर्भगृह में प्रवेश बंद है, लेकिन सोमवती अमावस्या के अवसर पर डिजिटल क्रिएटर अक्षय आनंद और उनके तीन साथियों को गर्भगृह में दर्शन की अनुमति मिलने का मामला सामने आया है। 15 जून की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद श्रद्धालुओं में नाराजगी बढ़ गई है।
सोमवती अमावस्या पर मंदिर में ढाई लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे। आम भक्तों को बैरिकेडिंग के पीछे से करीब 20 फीट दूर से दर्शन करने पड़े, जबकि कुछ लोगों को गर्भगृह में प्रवेश देकर विशेष दर्शन कराए गए। इतना ही नहीं, उन्होंने गर्भगृह में तस्वीरें भी खिंचवाईं। जबकि मंदिर परिसर में मोबाइल फोन पूरी तरह प्रतिबंधित हैं।
तस्वीरें वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने मंदिर समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। कई यूजर्स ने पूछा कि नियमों को दरकिनार कर अनुमति किसने दी। कुछ लोगों ने ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जबकि अन्य ने आरोप लगाया कि क्या नियम केवल आम श्रद्धालुओं के लिए ही लागू हैं।
मंदिर में वीआईपी संस्कृति नहीं होनी चाहिए: सांसद
उज्जैन-आलोट सांसद अनिल फिरोजिया ने कहा कि मंदिर में वीआईपी संस्कृति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “मैं स्वयं अपने परिवार के साथ आम श्रद्धालुओं की तरह बैरिकेडिंग से दर्शन करता हूं। भगवान के सामने सभी समान हैं। गौरतलब है कि सांसद पहले भी आम श्रद्धालुओं को निर्धारित समय पर गर्भगृह में प्रवेश देने की मांग कर चुके हैं, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
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गर्भगृह प्रवेश के नियम क्या हैं?
मंदिर समिति के नियमों के अनुसार गर्भगृह में प्रवेश केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, पुजारी-पुरोहितों और संत-महात्माओं को ही दिया जा सकता है। आम श्रद्धालुओं के लिए सुबह 6 बजे से रात 9:30 बजे तक मानसरोवर द्वार से निशुल्क प्रवेश की व्यवस्था है। भस्म आरती और शयन आरती में केवल पूर्व बुकिंग वाले श्रद्धालु ही शामिल हो सकते हैं। वहीं 250 रुपये की रसीद के माध्यम से नंदी हॉल के पीछे से शीघ्र दर्शन की सुविधा उपलब्ध है।
मंदिर परिसर में मोबाइल प्रतिबंधित
मंदिर परिसर में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध है, लेकिन इसके बावजूद कई श्रद्धालु तस्वीरें खींचकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। वायरल तस्वीरों ने इस प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। गर्भगृह तक मोबाइल पहुंचने और वहां फोटो खींचे जाने की घटनाएं लगातार नियमों की अनदेखी को उजागर कर रही हैं।
क्या बोले जिम्मेदार?
मामले पर मंदिर समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने कहा कि संबंधित लोग एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के साथ मंदिर आए थे, इसलिए उन्हें गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी गई। हालांकि, उन्होंने उस न्यायाधीश का नाम सार्वजनिक नहीं किया।
